जोगेंद्र मावी, ब्यूरो
हरिद्वार। जिला पंचायती राज विभाग में हुए सोलर लाइट घोटालों में परत दर परत नए खुलासे हो रहे हैं। पूर्व डीपीआरओ ने ग्राम प्रधानों और ग्राम सेकेट्री पर दवाब बनाकर कई गांवों में लाखों का बजट निकलवा लिया गया है। जांच होने से भुगतान कराने वाले में हड़कंप मचा हुआ है, जहां पर लाइटें नहीं लगी वहां पर लाइटें लगवाना शुरू कर दिया है और जहां पर बजट की निकासी नहीं हुई और लाइटें लगवा दी गई वहां पर उखड़वानी शुरू हो गई है।

हरिद्वार के जिला पंचायती राज विभाग में सोलर लाइटें लगवाने के नाम पर करीब 5 करोड़ रुपये का घोटाला सामने आया है। तत्कालीन डीपीआरओ रहे मो मुस्तफा खान ने ग्राम पंचायतों के सेकेट्री और प्रधानों पर कमीशन का लालच दिलवाकर महंगे रेट पर सोलर लाइटें लगवाने का काम शुरू कराया गया। पूर्व डीपीआरओ ने पूरे जिले का काम एक ही ठेकेदार को सौंप दिया। जबकि ग्राम प्रधान स्वयं काम कराने में विश्वास करती है, ग्राम प्रधान कभी बाहर के ठेकेदार को काम नहीं देते। लेकिन डीपीआरओ खान के दवाब में एक ही ठेकेदार को भुगतान किया जाने लगा। यहीं नहीं लाइट की कीमत से चार गुना ज्यादा का भुगतान हुआ।

ग्राम प्रधानों ने कमीशन के लालच में ग्राम पंचायत विकास अधिकारियों के माध्यम से अधिकांश गांव में डेढ़ से ढाई लाख रुपये का बजट निकालना शुरू कर दिया। यह प्रक्रिया चल रही ही थी कि हाईकोर्ट के आदेश पर पूर्व डीपीआरओ अतुल प्रताप सिंह की वापसी हो गई। उनके वापसी होते ही सोलर लाइट के घोटाले की जांच शुरू हो गई। जिसमें भगवानपुर ब्लॉक के सेकेट्री अनुज शर्मा को लक्सर ब्लॉक अटैच कर दिया गया।
अब घोटाले सुचारू रहे, पूर्व डीपीआरओ मो मुस्तफा खान की वापसी के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए। जहां पर करीब 15 लाख की फीस का भुगतान करने के बावजूद उनकी याचिका निरस्त हो गई और अतुल प्रताप सिंह अपने पद पर बने रहे।
अब सोलर लाइट घोटाले की जांच में प्रतिदिन परत—दर परत नए खुलासे सामने आ रहे है। जहां पर भुगतान हो गया वहां पर सेकेट्री और प्रधानों ने लाइटें लगवा दी। और जहां पर तैयारी थी वहां पर काम रूक गया। कुछ गांव भी ऐसे भी सामने आए जहां पर भुगतान नहीं हुआ था और ठेकेदार ने सोलर लाइट लगवा दी थी, उन्हें उखाड़ने काम भी हो गया।

