जोगेंद्र मावी, ब्यूरो
हरिद्वार। मंगलौर विधानसभा — 33 का मुकाबला 2027 में रोचक होगा। भाजपा प्रत्याशी को स्थानीय मुद्दे के साथ स्थानीय नेताओं की नाराजगी का भी सामना करना पड़ेगा, क्योंकि वे नहीं चाहते कि उनका वजूद कम हो। हालांकि भाजपा से करतार भड़ाना फिर से तैयारी कर रहे हैं, हालांकि वे सत्ता होते हुए उपचुनाव नहीं जीत सके, अब जब 2027 में जब सीधा मुकाबला कांग्रेस प्रत्याशी से होगा। क्योंकि यहां से बसपा के प्रत्याशी रहे उबैदुर रहमान (मोंटी) रालोद में चले गए हैं। राजनैतिक सूत्रों की माने तो गुर्जर—जाट समाज के नेता भड़ाना को पचा नहीं पा रहे हैं। भड़ाना के मैदान में आने से उनकी वक्त कम हो गई है।


मंगलौर विधानसभा चुनाव में हाजी काजी के परिवार ही जीतते आ रहे हैं। मुस्लिम मतदाताओं के दो जगह बंटने पर भी भाजपा कोई करिश्मा नहीं कर पाई तो कैसे। जब—जब त्रिकोणीय चुनाव हुआ तो उस समय भी भारतीय जनता पार्टी का प्रत्याशी जीत नहीं सका। हालांकि 2012 में रालोद से चुनाव मैदान में उतरे गौरव चौधरी ने अच्छी टक्कर दी थी, लेकिन भाजपा प्रत्याशी तो 2000 वोटो पर सिमट कर रह गया था।
अब 2027 चुनाव में भारतीय जनता पार्टी से करतार सिंह भड़ाना चुनाव मैदान में उतरने के लिए तैयारी कर रहे हैं। वे लगातार जनता के बीच में हैं। वे खाटू श्याम की यात्रा कराने के साथ जनता के दुख दर्द में लगातार शामिल हो रहे हैं। उपचुनाव में तो स्थानीय नेताओं ने साथ दिया, लेकिन अब स्थानीय नेताओं ने उनसे दूरी बनानी शुरू कर दी है। स्थानीय नेता चाहते हैं कि हारे या जीते, उनके बीच का ही प्रत्याशी बनाया जाए।


अब मंगलौर विधानसभा में हाजी सरवत करीम अंसारी के निधन के बाद मुस्लिम समाज के बड़े नेता काजी निजामुद्दीन राजनीति में सक्रिय है और समूचे विधानसभा में 50 प्रतिशत वोट उनके समाज का ही है और अनुसूचित जाति के अधिकांश वोटर कांग्रेस के साथ है। तो ऐसे में भारतीय जनता पार्टी का प्रत्याशी मात्र 35 प्रतिशत वोटों तक सीमित नजर आता है। अब इन 35 प्रतिशत वोटों में से जाट और गुर्जर समाज के कई गांव और परिवार काजी परिवार के कट्टर समर्थक है। तो उन्हें भी काजी परिवार से तोड़ना नामुमकिन है, क्योंकि 2024 उपचुनाव में भी उन्होंने काजी का ही साथ दिया, हालां​कि वे ओपन नहीं थे, ​लेकिन वोट काजी परिवार को देकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
करतार सिंह भड़ाना पर धन की राजनीति करने का आरोप लगता रहा है, वे हर नाराज को धन से खरीदकर अपने खेमे में जोड़ लेते हैं। धन के बल पर मीडिया मैनेजमेंट भी किया जाता रहा है। लेकिन क्षेत्र के नेताओं की नाराजगी और चुनाव में उनके द्वारा वोट सरकाना मैनेजमेंट या क्रास वोटिंग कराने की आदत को कैसे दूर कर सकेंगे। इसी के साथ उपचुनाव में प्रदेश का पूरा दल—बल साथ मिला, लेकिन 2027 में सभी प्रत्याशी अपनी सीटों पर ही काम करेंगे। प्रचार करने वाले भी बंटे हुए रहेंगे।


मंगलौर विधानसभा सीट का डाटा
2002: बहुजन समाज पार्टी से काजी मोहम्मद निजामुद्दीन 6594 मतों से जीते थे।
2007: बहुजन समाज पार्टी से काज़ी मोहम्मद निजामुद्दीन 3393 मतों से जीते थे।
2012: बहुजन समाज पार्टी से सरवत करीम अंसारी 698 मतों से जीत थे। जिसमें सरवत करीम अंसारी को 24,706, जबकि काज़ी निज़ामुद्दीन को 24,008 मत प्राप्त हुए थे। रालोग प्रत्याशी गौरव चौधरी को 19,354 मत मिले, जबकि भाजपा प्रत्याशी कलीम को मात्र 2,061 मत पड़े थे।
2017: में कांग्रेस से काजी मोहम्मद निजामुद्दीन चुनाव जीते। काजी निज़ामुद्दीन को 31,352 और बसा प्रत्याशी सरवत करीम अंसारी को 28,684 मत मिले। जबकि भाजपा प्रत्याशी ऋषिपाल बलियान को कुल 16,964 मत मिले। काजी 2668 मतों से चुनाव जीते।
2022: बसपा पार्टी के सरवत करीम अंसारी ने 32,660 वोटो प्राप्त किए। ​​दूसरे स्थान पर कांग्रेस पार्टी के काजी मोहम्मद निजामुद्दीन रहे। जीत का अंतर 598 वोटों का था। काजी निज़ामुद्दीन को 32,062 और भाजपा प्रत्याशी दिनेश सिंह पंवार को कुल 18,763 वोट मिले।
2024: कांग्रेस पार्टी के काजी मोहम्मद निज़ामुद्दीन ने 31,727 वोटों से जीत हासिल की। ​​भाजपा पार्टी के करतार सिंह भडाना दूसरे स्थान पर रहे। जीत का अंतर 422 वोटों का था।
काजी निज़ामुद्दीन को 31,727 मत मिले, जबकि करतार सिंह भडाना को 31,305, उबैदुर रहमान (मोंटी) को 19,559 मत मिले।

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