जोगेंद्र मावी, ब्यूरो
हरिद्वार। ऐरा गैरा नत्थू गैरा यानि महत्वहीन व्यक्ति, जिन्हें एक बोर्ड का उपाध्यक्ष और सदस्य ऐसी जाति के लोगों को बना दिया है, जिन्हें माटी कला बोर्ड के उद्देश्य तक का पता नहीं है। यहां तक की इन्हें यह भी नहीं पता है ​कौन सी मिट्टी कहां पर मिलती है और कौन इनसे जुड़ा है। इन सभी को लेकर प्रजापति समाज में आक्रोश है।
माटी कला बोर्ड की उपाध्यक्ष प्रजापति समाज से नहीं है और न ही सदस्य बनाए गए हैं। माटी कला बोर्ड का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक मिट्टी के शिल्पकारों (कुम्हारों), कारीगरों के आर्थिक व तकनीकी विकास को बढ़ावा देना और इस कला को विलुप्त होने से बचाना है।
समाज के लोगों का कहना है कि बोर्ड का गठन प्रजापति (कुम्हार) समाज के हितों और उनके पारंपरिक व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए किया गया था, इसलिए बोर्ड के शीर्ष पदों पर समाज के प्रतिनिधियों को ही अवसर मिलना चाहिए। प्रजापति जन कल्याण समिति के अध्यक्ष कर्म सिंह ने कहा कि प्रजापति समाज पीढ़ियों से मिट्टी के बर्तन और माटी कला से जुड़े कार्य करता आया है। लेकिन इस समाज के लोगों से दूर रखा गया है।

अब कुम्हारान महारान धर्मशाला निकट तहसील ज्वालापुर में प्रजापति समाज की ओर से बड़ा विरोध प्रदर्शन है। समाज की प्रतिभावान ने आरोप लगाया है कि उपाध्यक्ष और सदस्य ऐसे समाज से बना दिए गए है, जिन्हें माटी कला बोर्ड के उद्देश्य के बारे में कोई जानकारी नहीं है। ऐसे में इस संस्कृति से जुड़े लोगों का विकास कैसे होगा।

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