ब्यूरो रिपोर्ट
उत्तराखंड पुलिस विभाग में एक कोतवाल की हरकत से पूरे विभाग में हड़कंप मच गया। कोतवाल कांस्टेबल के तबादले से इतने आहत हुए कि ड्यूटी पर न जाकर उन्होंने अपने को कमरे में बंद कर लिया। हालांकि एसएसपी ने पूरे मामले में जांच बैठा दी है।
मल्लीताल कोतवाली उस समय अचानक सुर्खियों में आ गई, जब कोतवाल हेम पंत ने खुद को अपने आवासीय कमरे में बंद कर लिया। काफी देर तक दरवाजा नहीं खुलने और भीतर से कोई जवाब नहीं मिलने पर पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। अनहोनी की आशंका के बीच पुलिसकर्मियों ने दरवाजा तोड़कर भीतर प्रवेश किया, जहां कोतवाल कथित तौर पर रोते-बिलखते मिले। घटना के बाद पूरे पुलिस विभाग में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया। बताया जा रहा है कि पिछले कुछ समय से कोतवाल मानसिक तनाव में चल रहे थे। मामला उनकी संबद्धता समाप्त होने के बाद मूल तैनाती अल्मोड़ा भेजे जाने से जुड़ा बताया जा रहा है।
बुधवार सुबह करीब दस बजे तक कोतवाल हेम पंत कोतवाली नहीं पहुंचे। इसके बाद पुलिसकर्मी उनके आवास पहुंचे और दरवाजा खटखटाया, लेकिन अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। कई बार आवाज लगाने के बावजूद जवाब नहीं मिलने पर पुलिसकर्मियों में घबराहट फैल गई। आखिरकार दरवाजा तोड़कर अंदर पहुंचे कर्मियों ने कोतवाल को भावुक और परेशान हालत में देखा। घटना की सूचना मिलते ही सीओ अंजना नेगी और एलआईयू की टीम भी मौके पर पहुंच गई। पुलिस अधिकारियों ने पूरे मामले को गोपनीय रखने की कोशिश की और पत्रकारों को कर्मचारी आवास की ओर जाने से रोक दिया गया।


कई घंटे तक निगरानी के बाद पुलिस ने कोतवाल के परिजनों को बुलाया और उन्हें परिवार के साथ भेज दिया। घटना के बाद पुलिस महकमे में दिनभर चर्चाएं चलती रही। वहीं शहर में भी यह सवाल बना रहा कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि एक कोतवाल को खुद को कमरे में बंद करना पड़ा और हालात इतने तनावपूर्ण हो गए कि अनहोनी की आशंका तक पैदा हो गई। कुछ दिन पहले कोतवाली में तैनात एक पुलिसकर्मी का स्थानांतरण कर दिया गया था। इसके बाद कोतवाल हेम पंत ने एसएसपी से कर्मियों की कमी का हवाला देते हुए स्थानांतरण रोकने और अतिरिक्त कांस्टेबल तैनात करने की मांग की थी।
आरोप है कि महिला कांस्टेबल के स्थानांतरण पर सवाल उठाने और कर्मियों की मांग करने के बाद उन्हें मूल तैनाती पर भेज दिया गया। एसएसपी डॉ. मंजूनाथ टीसी ने बताया कि नैनीताल जिले में कोतवाल समेत सात पुलिसकर्मी संबद्ध चल रहे थे, जिन्हें तीन दिन पहले ही मूल तैनाती पर भेजने के आदेश जारी किए गए थे। बताया कि आदेश जारी होने के बाद कोतवाल की ओर से कांस्टेबल की कमी का मुद्दा उठाया गया था, जिस पर जल्द तैनाती का आश्वासन भी दिया गया था। पूरे घटनाक्रम की जानकारी मीडिया के माध्यम से मिली है। कोतवाल की ओर से पुलिस विभाग को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। मामले में रिपोर्ट तलब कर ली गई है और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

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