जोगेंद्र मावी, ब्यूरो
कहावत है कि पूत कपूत तो क्यों धन संचय, पूत सपूत तो क्यों धन संचय। चरितार्थ होती है पूर्व मुख्य सचिव के नालायक पूत पर। जिन्होंने जीवन भर धन कमाया और पूत निकला नालायक और बदनामी का कारण भी।
उत्तराखंड के पूर्व मुख्य सचिव के बेटे आर यशोवर्धन को देहरादून पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पुलिस का कहना है कि यशोवर्धन खुद को IPS और केंद्रीय इंटेलिजेंस अधिकारी बताकर लोगों को ठगा करता था। राजपुर पुलिस ने यशोवर्धन को आज गिरफ्तार किया है। इसके बाद शाम को उसे प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मीडिया के सामने पेश किया।
पूर्व बड़े प्रशासनिक अफसर का बेटा गिरफ्तार
उत्तराखंड के एक पूर्व बड़े प्रशासनिक अफसर के बेटे यशोवर्धन पर महिला वैज्ञानिक को फर्जी नियुक्ति पत्र, पेटेंट और सरकारी अनुदान का झांसा देने का आरोप है। पुलिस को उसके पास से वॉकी-टॉकी, सैन्य वर्दी, फर्जी रक्षा मंत्रालय बैंड और टोपियां बरामद हुई हैं। यशोवर्धन पर देहरादून में ठगी का दूसरा मुकदमा दर्ज हुआ है। आरोपी की कोर्ट में पेशी होगी। राजपुर एसओ पीडी भट्ट ने बताया कि यशोवर्धन नाम के युवक को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। थाना राजपुर में महिला की शिकायत पर उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ है।

खुद को बड़ा अफसर बताता था यशोवर्धन
एसपी सिटी के अनुसार गिरफ्तार आरोपी यशोवर्धन लोगों को अपने प्रभाव में लेने के लिए खुद को कभी फर्जी आईपीएस अधिकारी, वरिष्ठ सैनिक अधिकारी, रॉ एजेंट, सीआरपीएफ अधिकारी और अन्य एजेंसियों का वरिष्ठ अधिकारी बताता था। इससे प्रभावित होकर लोग इसके झांसे में आ जाते थे।
देहरादून के एसपी सिटी प्रमोद कुमार ने बताया कि उत्तराखंड के पूर्व प्रशासनिक अधिकारी के बेटे यशोवर्धन की गिरफ्तारी के बाद प्रेस कॉन्फेंस की। उन्होंने बताया कि गिरफ्तार यशोवर्धन के पिता उत्तराखंड के बड़े प्रशासनिक अफसर रहे तो वो भी अफसर बनने का सपना देखता था। अधिकारी बनने का सपना टूटने पर फर्जी आईपीएस अधिकारी बन अपनी फर्जी आईडी और विजिटिंग कार्ड बनाए थे।
एसपी ने बताया पहले मुकदमे का मामला
एसएसपी ने बताया कि आरोपी के खिलाफ दो अलग-अलग मुकदमे दर्ज हैं। पहला मामला 8 जुलाई 2026 का है, जिसमें डाकरा बाजार निवासी अंशुल त्यागी ने शिकायत दर्ज कराई कि आरोपी ने स्वयं को वरिष्ठ अधिकारी बताते हुए उनकी दिवंगत माता के नाम पर कंपनी का पंजीकरण कराने का झांसा देकर 15 लाख रुपये की ठगी की।

ये था फ्रॉड वाला दूसरा मामला
दूसरा मामला 15 जुलाई 2026 को सामने आया, जिसमें कैनाल रोड निवासी डॉ. अनुपमा ने आरोप लगाया कि यशोवर्धन ने खुद को आईपीएस अधिकारी बताकर फर्जी आईडी और विजिटिंग कार्ड दिखाए और रक्षा मंत्रालय में डेटा साइंस कंसल्टेंट की नौकरी दिलाने के नाम पर 4.60 लाख रुपए हड़प लिए गए।
गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने की थी विशेष टीम गठित
दोनों मामलों की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी ने विशेष टीम गठित की। पुलिस ने घटनास्थलों के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली और साक्ष्य जुटाने के बाद थाना राजपुर पुलिस ने आरोपी यशोवर्धन को 16 जुलाई को मसूरी रोड पर चेकिंग के दौरान सीएसआई तिराहे के पास से गिरफ्तार किया।
चैंपियन के बेटे के साथ मारपीट मामले में चर्चा में था यशोवर्धन
यशोवर्धन इससे पहले उत्तराखंड के बाहुबली नेता कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन के बेटे के साथ मारपीट मामले को लेकर सुर्खियों में आ चुके हैं। 14 नवंबर 2025 को पूर्व विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन के बेटे दिव्य प्रताप सिंह और उत्तराखंड के पूर्व बड़े अधिकारी के बेटे आर यशोवर्धन के साथ मारपीट का मामला सामने आया था।
गिरफ्तार आरोपी से बरामदगी
आरोपी के पास से 5 फर्जी आईडी कार्ड, 8 फर्जी विजिटिंग कार्ड, पुलिस/आर्मी के 25 लोगो, आर्मी/पैरामिलिट्री की 3 जोड़ी वर्दी, 3 फर्जी रिबन, 1 वायरलेस सेट, 1 लैपटॉप बरामद किया है।
