ब्यूरो रिपोर्ट
थाने के अंदर 19 वर्षीय शिवानी की हत्या का मामला अब केवल हत्या या प्रेम प्रसंग तक सीमित नहीं रह गया है। प्रकरण को लेकर पुलिस महकमे की किरकिरी तो हुई ही साथ ही प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं।
“सात साल पुराना प्रेम संबंध था. एक, दो बार लड़की के पिता ने शिकायत भी की थी. दोनों ने घर छोड़ कर खत्री पहाड़ पर विंध्यवासिनी मंदिर में शादी कर ली थी और हाई कोर्ट में शादी के पंजीकरण के लिए अप्लाई भी कर दिया था.”
यूपी के बांदा जिले में वर्षों तक चले प्रेम संबंध, परिवारों के विरोध, घर छोड़कर की गई शादी और आखिरकार थाने के भीतर हुई हत्या ने पूरे घटनाक्रम को कई गंभीर सवालों के केंद्र में ला खड़ा किया है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस युवती को सुरक्षा और न्याय दिलाने के लिए थाने लाया गया था, उसकी जान पुलिस की मौजूदगी में कैसे चली गई। पुलिस को देखकर पीड़ित की हिम्मत बंधनी तो दूर की बात यहां जान ही चली गई। घटना के वक्त ऐसा नहीं था कि सूनसान स्थान पर घटनाक्रम को अंजाम दिया गया हो बल्कि खाकी की मौजूदगी में यह दुस्साहस किया गया।
बरछा-बा गांव निवासी शिवानी और पड़ोस में रहने वाले ललित वर्मा का प्रेम संबंध करीब दो वर्ष पुराना बताया जा रहा है। दोनों परिवारों को जानने वालों का कहना है कि प्रेम प्रसंग को लेकर कई बार विवाद भी हुआ लेकिन पक्षों को समझा-बुझाकर शांत करा दिया गया। दोनों के परिवारों को इसकी जानकारी थी और कई बार समझौते के प्रयास भी हुए, लेकिन बात नहीं बनी।


घर छोड़कर चली गई थी शिवानी
18 मई को शिवानी घर छोड़कर ललित के साथ चली गई और दोनों ने विवाह कर लिया। बेटी के इस फैसले से नाराज पिता सत्यकुमार सिंह लगातार उसे वापस लाने की कोशिश कर रहा था। सूचना पर कई बार वह बेटी को तलाशने भी निकला था।
मध्यप्रदेश से पति के साथ लाई थी पुलिस
इस दौरान शुक्रवार को मध्य प्रदेश से शिवानी और उसके पति को पकड़कर बदौसा थाने लाया गया। यहां युवती के बयान और मेडिकल परीक्षण की प्रक्रिया चल रही थी। किसी को जरा सा अंदेशा भी नहीं था कि अगले कुछ ही पलों में किसी की जान जाने वाली है।
इसी दौरान मौका मिलते ही पिता ने जेब से रामपुरी चाकू निकालकर बेटी पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल शिवानी को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने इलाज के दौरान डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।


पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल
घटना के बाद सामने आए तथ्यों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, थाने में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं थी और न ही आरोपी की प्रभावी तलाशी ली गई। अगल समय रहते पुलिस मामले की संवेदनशीलता को भांप जाती तो शायद आज शिवानी जिंदा होती। पुलिस की यही लापरवाही युवती की हत्या की वजह तो बनी ही साथ ही महकमे की जमकर चौतरफा किरकिरी भी हो रही है। पुलिस के लिए भी चुनौती है।
कई थाना प्रभारी इधर से उधर
एसपी पलाश बंसल ने कोतवाली देहात में तैनात सीपी तिवारी को थाना बिसंडा, अतर्रा प्रभारी संजीव चौबे को देहात कोतवाली, बबेरू थाना में तैनात उपनिरीक्षक राधाकृष्ण तिवारी बदौसा की कमान सौंपी है। इसके साथ ही 10 उपनिरीक्षकों का भी कार्यक्षेत्र परिवर्तित किया गया है।

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