जोगेंद्र मावी, ब्यूरो
हरिद्वार। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरि की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मृत्यु को साजिशन हत्या करार दिया है। निरंजन पीठाधीश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज ने पूरे हादसे पर कई सवाल उठाते हुए कहा कि यदि सच्चाई सामने नहीं आई तो 13 अखाड़े के महंत संतों के साथ करोड़ों साधु आंदोलन करने को बाध्य होंगे। उन्होंने हत्या में बड़े—बड़े लोगों के शामिल होने की आशंका जताई।
निरंजनी अखाड़े के श्रीमहंत नरेंद्र गिरि की मृत्यु का मामला गहराता जा रहा है। अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज का कहना है कि श्रीमहंत नरेंद्र गिरी ने जीवन में कभी कुछ नहीं लिखा। जब भी कोई पत्र लिखा जाता था तो वे केवल हस्ताक्षर करते थे। तो उन्होंने 7—8 पेज का सुसाइड लेख कैसे लिखा। सुसाइड नोट को कई बार पढ़ा। जिसमें कई असमानता सामने आ रही है। वे पिछले 2003 से साथ थे। जब भी कोई बातचीत होती थी तो कभी उन्होंने कभी कोई चिंता नहीं जताई। यदि कोई घटना हो जाती थी तो वे चर्चा जरूर करते थे। यह घटना कोई अनहोनी नहीं है यह होनी थी और इसे लोगों ने किया। यह सुसाइड नोट नहीं है ये साजिश नोट है। नरेंद्र गिरि महाराज के हस्ताक्षर तक नहीं है। उन्हें सनोफ व ओबलिक लिखना नहीं आता था। वो एस नहीं लिखते थे। ये शब्द पढ़े लिखे लोगों के है। कही एम नरेंद्र गिरि, महंत नरेंद्र गिरि लिखा गया है। व्यक्ति का एक ही हस्ताक्षर होता है। पेन भी दो कलर के प्रयोग किए गए है। कथित सुसाइड नोट को कई बार पढ़ा और घटनाक्रम को बारिकी से देखा है। ये नरेंद्र गिरि की हत्या नहीं है ये समाज की हत्या नहीं है, परंपरा, अखाड़ों, सामाजिक हत्या की गई है। नरेंद्र गिरि दो करोड़ साधुओं का नेतृत्व करते थे। इसकी पुनरावृत्ति नहीं हो इसकी जांच हो और दोषियों को सजा मिल सके।
उन्होंने कहा कि नरेंद्र गिरी को वाई प्लस सुरक्षा मिली है। घटना के समय कोई सुरक्षा नहीं थी, करीब 400—500 लोग रहते थे, उस समय कोई नहीं था। देखिए बड़ी बात उस समय कोई नहीं था। यह सोची समझी साजिश रची गई है। उन्होंने मांग उठाई कि उनकी हत्या समाज के सामने खुलने चाहिए। 13 अखाड़े आंदोलन करने को बाध्य होंगे। इसके लिए सभी के प्रतिनिधियों से बातचीत हो चुकी है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी पर पूरा भरोसा है। वे सत्य को सामने लाएंगे।

