जोगेंद्र मावी, ब्यूरो
हरिद्वार। जनपद हरिद्वार में खनन प्रमुख संस्था मातृसदन की याचिका पर हाईकोर्ट के आदेश पर बंद हुआ है, लेकिन खनन बंद होने पर खनन कारोबारी राज्य सरकार को बदनाम करने का काम कर रहे हैं। अवैध खनन कर अकूत काली कमाई करने वाले खनन माफियाओं की लॉबी षड़यंत्र रच रही है। खनन बंद होने से जनपद में सरकारी, गैर सरकारी और मकान तक के निर्माण कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। खनन बंद होने का फायदा स्टोन क्रशर संचालक खूब उठा रहे हैं, वे मनमाने रेट पर सामग्री बेचकर मोटा मुनाफा कमा रहे हैं।
मार्च—2022 महीने में मातृसदन की याचिका पर हाईकोर्ट ने खनन को बंद कराते हुए जिलाधिकारी को तलब किया था। हाईकोर्ट के आदेश को लागू कराते हुए जिला प्रशासन ने तभी से हरिद्वार जनपद में खनन को बंद कर दिया गया। खनन बंद होने से खनन कारोबारियों का काम बंद हो गया। खनन खुलवाने के लिए हाईकोर्ट में तो गए नहीं, बल्कि राज्य सरकार को बदनाम करने में लग गए। इससे भी काम नहीं चला तो वे प्रचार कराने लगे कि खनन शुरू कराने के लिए उनसे मोटी रकम मांगी जा रही है। वे मजदूरों और आमजन को लोभ—लालच लेकर ज्ञापन आदि दिलवाने में भी लग गए। लेकिन हाईकोर्ट की सख्ती के चलते हुए उनका मंसूबा कामयाब नहीं हुआ।
सबसे ज्यादा परेशान ऐसे खनन माफिया है जोकि केवल अवैध खनन कराने में मसगूल रहते हैं। वे एक रवन्ने पर पूरे दिन खनन कराते हैं, जिन्होंने गंगा और सहायक नदियों को छन्नी कर दिया।
खनन करने वाले पट्टा किसी अन्य स्थान पर लेते हैं और खनन दूसरे स्थान पर कराते हैं। सबसे बड़ी बात तो यह है कि ये जिला प्रशासन केवल चुगान का और तीन फीट गहराई तक खोदने की अनुमति जारी करते हैं, लेकिन यह चुगान के बजाय मशीनें उतारकर खनन कराते हैं।
ये खनन करने वाले सबसे बड़े नियम जोकि सूर्योदय और सूर्यास्त तक चुगान करने वाले नियम का तो पालन ही नहीं करते, पौकलैंड जैसी मशीनें उतारकर पूरी रात अवैध खनन कराते हैं, हालांकि इनके इस अवैध खेल में जिला पुलिस—प्रशासन की मशीनरी पूरी तरह से संलिप्त रहती है। सूत्रों की माने तो वे एक रात के 25 हजार से 2 लाख रुपये तक लेते हैं। कुछ अधिकारी तो बचत का 33 प्रतिशत तक का हिस्सा लेते हैं। यदि कोई स्थानीय व्यक्ति का संस्था का व्यक्ति साक्ष्य उपलब्ध कराकर शिकायत करता है तो खनन माफिया की एक जेसीसी या दो चार डम्फर सील कर देते हैं। कई बार तो अपनी जेब गर्म कर ऐसे ही छोड़ देते हैं।
हालां​कि खनन का काम बंद होने से इस कारोबार से मोटी कमाई में संलिप्त होने वाले अधिकारी भी परेशान है, उनकी भी निगाह खनन खुलने पर लगी हुई हैं।