जोगेंद्र मावी, ब्यूरो
हरिद्वार। रुड़की में दो उप निरीक्षकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोप है कि दोनों उप निरीक्षकों पर दर्ज मुकदमे में फाइनल रिपोर्ट लगाने के नाम पर रिश्वत लेने और आरोपी को गोली मारकर जेल भेजने की धमकी देने के आरोप लगे हैं। हालांकि, एसपी देहात की जांच में दोनों पुलिसकर्मियों को दोषी पाया गया था। इसके बावजूद मुकदमा दर्ज होने में 16 महीने लग गए। हालांकि शिकायतकर्ता अधिकारियों की चौखट पर भटकता रहा। तमाम पटलों पर अपनी बातें रखी।
क्या था मामला? बता दें कि उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के निरपुड़ा गांव निवासी निश्चय राणा की शिकायत पर तत्कालीन विवेचक मनदीप सिंह और उप निरीक्षक बलवंत पंवार के खिलाफ कार्रवाई की गई है। शिकायतकर्ता ने दोनों पुलिसकर्मियों पर अलग-अलग समय में रिश्वत लेने और अतिरिक्त रकम के लिए दबाव बनाने का आरोप लगाया है।
शिकायत के मुताबिक, रुड़की के गणेश विहार निवासी एक महिला ने ने 5 जुलाई 2023 को रुड़की के गंगनहर कोतवाली में एक मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप था कि उसकी पुत्री को कुछ लोग ब्लैकमेल कर रहे थे, जिससे आहत होकर उसने 4 फरवरी—2023 को घर में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली थी।
जिसमें निश्चय राणा के छोटे भाई निवेश राणा को आरोपी बनाया गया था। शिकायतकर्ता का आरोप है कि साल 2023 फरवरी महीने की घटना को लेकर 5 माह बाद मुकदमा दर्ज कराया गया। तत्कालीन विवेचक उप निरीक्षक मनदीप सिंह ने फाइनल रिपोर्ट लगाने के नाम पर डराया-धमकाया और 3 लाख 50 हजार रुपए ले लिए।
इसके बाद 6 अक्टूबर 2024 को मुकदमे में अंतिम रिपोर्ट प्रेषित कर दी गई। निश्चय राणा के मुताबिक, बाद में मुकदमे की दोबारा विवेचना शुरू हुई, तो उप निरीक्षक बलवंत पंवार से संपर्क हुआ। आरोप है कि उन्होंने भी फाइनल रिपोर्ट लगाने के लिए पांच लाख रुपए की मांग की। रकम नहीं देने पर निवेश राणा को गोली मारकर जेल भेजने की धमकी दी गई।
शिकायतकर्ता का कहना है कि भाई की सुरक्षा के डर से उन्होंने एक लाख रुपए दे दिए, लेकिन इसके बाद चार लाख रुपए की अतिरिक्त मांग की जाने लगी। रकम देने में असमर्थता जताने पर विवेचना रोकने और झूठे मुकदमे में फंसाकर जेल भेजने की धमकी देने का भी आरोप है।
शिकायतकर्ता ने बताया कि उन्होंने 1 जुलाई 2025 को तत्कालीन एसएसपी को ऑडियो-वीडियो और अन्य साक्ष्य उपलब्ध कराए थे। इसके बाद एसपी देहात से जांच कराई गई। शिकायत के मुताबिक, जांच आख्या में दोनों उप निरीक्षकों को दोषी पाया गया।
मुकदमा दर्ज होने में 16 महीने लगे
18 अक्टूबर 2026 को दी गई शिकायत के साथ जांच आख्या की छायाप्रति भी संलग्न की गई थी। हालांकि, खास बात ये है कि शिकायतकर्ता के मुताबिक, एसपी देहात की जांच में दोनों पुलिसकर्मियों को दोषी पाया गया था। इसके बावजूद मुकदमा दर्ज होने में 16 महीने लग गए।
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