जोगेंद्र मावी, ब्यूरो
हरिद्वार। शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता समाप्त करने तथा पूर्व में नियुक्त सेवारत शिक्षकों को टीईटी से स्थायी छूट प्रदान किए जाने की मांग को लेकर शुक्रवार को उत्तरांचल स्टेट प्राइमरी टीचर्स एसोसिएशन के आह्वान पर जिलेभर के प्राथमिक शिक्षकों ने कलेक्ट्रेट भवन हरिद्वार में विशाल प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में एकत्र शिक्षकों ने विकास भवन से डी एम कार्यालय तक पैदल मार्च निकालते हुए जोरदार प्रदर्शन कर सरकार से अपनी मांगों पर शीघ्र निर्णय लेने की मांग की।
प्रदर्शन में जिले के विभिन्न ब्लॉकों से पहुंचे हजारों शिक्षक एवं संगठन के पदाधिकारी दोपहर विकास भवन के सामने मैदान में एकत्र हुए। यहां आयोजित सभा में वक्ताओं ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा सभी शिक्षकों के लिए टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य किए जाने संबंधी हालिया निर्णय एवं दिशा-निर्देशों से वर्षों से कार्यरत शिक्षकों में असमंजस और असुरक्षा की स्थिति उत्पन्न हो गई है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से विद्यालयों में सेवाएं दे रहे शिक्षकों को टीईटी की बाध्यता से स्थायी रूप से मुक्त किया जाना चाहिए।


सभा के उपरांत शिक्षक विकास भवन से जुलूस के रूप में होते हुए हरिद्वार कलक्ट्रेट भवन पहुंचे, जहां उन्होंने जिलाधिकारी कार्यालय में सरकार के विरुद्ध नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि राज्य के प्राथमिक विद्यालयों में वर्षों से सेवाएं दे रहे शिक्षकों के अनुभव एवं कार्यकुशलता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सरकार को शिक्षकों के हितों को ध्यान में रखते हुए व्यावहारिक एवं न्यायोचित निर्णय लेना चाहिए।
वक्ताओं ने कहा कि यदि पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से स्थायी छूट नहीं दी जाती है तो इससे हजारों शिक्षकों का भविष्य प्रभावित होगा। उन्होंने सरकार से इस संबंध में शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेते हुए शिक्षकों की वर्षों की सेवाओं का सम्मान करने की मांग की।


जिला अध्यक्ष अश्वनी चौहान, महामंत्री हेमेंद्र चौहान, कोषाध्यक्ष अरविंद शर्मा, राजीव शर्मा, मुकेश चौहान, मनमोहन, पंकज बिश्नोई, अनिल चमोली, केहर सिंह, प्रवीण कुमार, कुलदीप, बबलू अधाना, विकास शर्मा, सुखबीर सैनी, प्रविंद्र, राजीव शर्मा, आलोक शर्मा, इकबाल अहमद, शालिनी गोस्वामी, नूपुर शर्मा, अंजेश, वीर सिंह, अमरीष वर्मा, ईश्वर सिंह, कविता शर्मा, सरिता त्यागी, प्रतिभा सैनी, सहित अधिसंख्या में शिक्षक उपस्थित रहे।
शिक्षक नेताओं ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई तो संगठन आंदोलन को और व्यापक रूप देगा। इस दौरान शिक्षकों ने एक स्वर में कहा कि सेवारत शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए संघर्ष निरंतर जारी रहेगा।

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