जोगेंद्र मावी, ब्यूरो
हरिद्वार। मंत्री के विभाग पंचायती राज में हुआ करीब 5 करोड़ के घोटाले में हाईकोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है। जो सोलर लाइट 10 हजार रुपये में खरीदी जा रही थी, तो नए मंत्री के कार्यकाल में 20 हजार तक में खरीद कर डाली इस घोटाला की नींव पूर्व डीपीआरओ मुस्तफा खान के कार्यकाल में डाली गई, जोकि एक ही ठेकेदार को पूरे जनपद के प्रत्येक गांव में सोलर लाइट लगाने के लिए ग्राम प्रधानों पर दवाब बनाया था। थी।
जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों में सोलर स्ट्रीट लाइटों की खरीद में अनियमितताओं के आरोपों को लेकर दाखिल रिट याचिका पर उत्तराखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। न्यायालय ने याचिका को सीधे तौर पर सुनवाई के लिए स्वीकार करने से इनकार करते हुए मामले को सक्षम प्राधिकारी के समक्ष रखा है। कोर्ट ने पंचायती राज विभाग के सचिव को याचिकाकर्ता की ओर से प्रस्तुत प्रत्यावेदन पर कानून के अनुसार निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं।
यह आदेश 4 नवंबर 2026 को न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय एवं न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी, ए.सी.जे. की पीठ ने WP(PIL)/159/2026, सुरेंद्र कुमार बनाम राज्य उत्तराखंड एवं अन्य मामले में पारित किया।

याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में आरोप लगाया गया कि हरिद्वार जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों में सोलर स्ट्रीट लाइटों की खरीद में अनियमितताएं की जा रही हैं। याचिका में संबंधित अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई, विभागीय जांच तथा खरीद एवं स्थापना से संबंधित संपूर्ण रिकॉर्ड की न्यायिक जांच कराने सहित विभिन्न राहतों की मांग की गई थी।
पहले ही दिया जा चुका था प्रत्यावेदन
अदालत के आदेश के अनुसार याचिकाकर्ता ने अपनी शिकायत को लेकर 7 अगस्त 2026 को पंचायती राज विभाग के सचिव के समक्ष प्रत्यावेदन प्रस्तुत किया था। इसके बाद 12 अक्टूबर 2026 को रिमाइंडर भी दिया गया।
हाईकोर्ट ने कहा कि उठाए गए मुद्दों की जांच सक्षम प्राधिकारी द्वारा किया जाना उचित है। इसी आधार पर न्यायालय ने रिट याचिका का निस्तारण करते हुए पंचायती राज विभाग के सचिव को निर्देश दिया कि वे 7 अगस्त 2026 के प्रत्यावेदन पर कानून के अनुसार निर्णय लें।
प्रतिवादी नंबर-7 को सुनने के बाद होगा फैसला
कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि निर्णय लेने से पहले प्रतिवादी नंबर-7 को सुनवाई का अवसर दिया जाए। साथ ही यह प्रक्रिया याचिकाकर्ता द्वारा न्यायालय के आदेश की प्रमाणित प्रति प्रस्तुत किए जाने की तारीख से चार माह के भीतर पूरी करने को कहा गया है।
आरोपों की पुष्टि नहीं, जांच का रास्ता खुला
गौरतलब है कि हाईकोर्ट के आदेश में सोलर स्ट्रीट लाइट खरीद में लगाए गए आरोपों को सही ठहराने का कोई निष्कर्ष नहीं दिया गया है। अदालत ने मामले को सक्षम विभाग के स्तर पर कानून के अनुसार जांचकर निर्णय लेने के लिए भेजा है। अब पंचायती राज विभाग के सचिव द्वारा प्रत्यावेदन पर क्या निर्णय लिया जाता है, इस पर सभी की नजरें रहेंगी।
