जोगेंद्र मावी, ब्यूरो
हरिद्वार। विश्व पर्यावरण दिवस पर मिशन ग्रीन फाऊंडेशन ने मेगा इन्वारमेंटल टॉक शो आयोजित कर एक बड़ी पहल की है। इस टॉक शो के माध्यम से देश प्रसिद्ध 35 संत ऑन लाइन जुड़े और उन्होंने अपने करोड़ों अनुयायियों को पर्यावरण संरक्षण, पॉलीथीन हटाने, अधिक से अधिक पौधे लगाने, जल संरक्षण, प्रदूषण कम करने सहित अनेक बिंदुओं के बारे में जागरुक किया और उन्हें पर्यावरण संरक्षण में अपना योगदान देने का संदेश व आदेश दिया। कार्यक्रम के आयोजक मिशन ग्रीन फाऊंडेशन के अध्यक्ष सहजानंद सरस्वती व संस्था के सचिव प्रद्युमन सुरी ने बताया कि इस प्लेटफॉर्म पर अनेक साधु संधों ने पर्यावरण को लेकर अपने विचार व संदेश व्यक्त किए और इसे एक अति सराहनीय पहल बताया।
निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामण्डलेश्वर कैलाशानंद गिरी जी ने कहा कि वर्तमान में पर्यावरण पर जो संकट के बादल छाए हैं उसके लिए स्वयं मानव ही जिम्मेवार है। भोग-विलास के अनेक संसाधन जुटाने व भौतिक जगत के सुख पाने की चाह में पर्यावरण की घोर अनदेखी हुई है, जिसका परिणाम वर्तमान में हमारे सामने अनेक प्राकृतिक आपदाओं के रूप में सामने आ रहा है। परंतु अभी भी देर नहीं हुई है यदि मानव जगत पर्यावरण को पुनजीर्वित करने का संकल्प ले ले तो हम फिर से अपनी धरा को हरियाली संपदा से परिपूर्ण कर सकते हैं। उन्होंने देश के प्रत्येक जन से आग्रह किया कि पर्यावरण संरक्षण हेतु हर संभव सहयोग दें ताकि पर्यावरण प्रदूषण के चलते हमारी पृथ्वी पर छाए संकट के बाद छंट सकें। उन्होंने कहा कि आज जल, वायु, अन्न सब कुछ दूषित हो जा रहा है इस पर गंभीर विचार करने की आवश्यकता है।
उत्तराखंड की राज्यपाल महामहिम बेबीमौर्य भी मेगा टॉक शो से विशेष रूप से जुड़ी। उन्होंने स्वामी सहजानंद सरस्वती को इसके लिए बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने संत समाज को पर्यावरण संरक्षण की मुहिम से जोडक़र एक प्रशंसनीय कार्य है और यह निश्चित रूप से सफल होगा। हमें अपने पर्यावरण व प्रकृति की देखभाल हर स्तर पर करनी चाहिए। पर्यावरण युक्त-पॉलिथीन मुक्त अभियान की सराहना करते हुए कहा कि हमें पर्यावरण को भारी हानि पहुंचाने वाले पॉलिथीन को छोडक़र कपड़े का थैला अपनाना चाहिए और पर्यावरण संरक्षण में अपना योगदान देना चाहिए।
महामण्डेश्वर स्वामी चिदंबरानंद ने कहा कि पर्यावरण को हम जितना जल्दी समझ लेंगे उतना ही ठीक है। संतों ने हमेशा ही आज हम लोग जितना जल्दी समझ लेंगे उतना ठीक है। संतों ने हमेशा पर्यावरण की रक्षा की है। संतों ने हमेशा प्रकृति को माता का दर्जा दिया है। संतों ने हमें तो जल को देवता कहा है। संत समाज सदैव मानव मात्र व समाज का पथ प्रदर्शक रहा है तथा पर्यावरण की दिशा में भी उसने अपनी भूमिका अदा की है और भविष्य में भी वह अपने इस दायित्व को पूरी निष्ठा के साथ निभाएगा।
अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी ने कहा कि जो व्यक्ति अपने गुरुओं के पास पॉलिथीन में समान लेकर जाता है वह अपने साथ पर्यावरण को दूषित करने का पाप लेकर जाता है। हमेंं हमारे पर्यावरण में जहर घोलते जा रहे पॉलिथीन व प्लास्टिक का पूरी तरह से बहिष्कार कर कपड़े के थैले अपनाने चाहिए।
बालकिशन महाराज ने कहा कि अपने घर से कपड़े का थैल लेकर चलें और पंच तत्वों को बचाएं। उन्होंने कहा कि आज जल, पृथ्वी, आकाश, वायु सभी दूषित हो चुके हैं जिसका जिम्मेवार मानव स्वयं है। इसलिए पर्यावरण को जो नुकसान उसने पहुंचाया है उसे ठीक करने का दायित्व भी उसी का है।
स्वामी राजेंद्रानंद ने कहा कि पॉलिथीन को अपना हम पाप के भागी बन रहे हैं क्योंकि गोमाता इसमें रखी सामग्री को खाकर काल का ग्रास बन रही है। वहीं पॉलिथीन से हो रहे पर्यावरणीय नुकसान से हम पाप के भागी बन रहे हैं इसलिए पॉलिथीन को तुरंत प्रभाव से अपने जीवन से हटाकर पुन: कपड़े के थैले को अपनाएं और पर्यावरण को बचाएं।
ज्ञानानंद महाराज ने बताया कि हमारी संस्कृति में पर्यावरण को नुकसान पहुंचाना सिखाया ही नहीं गया बल्कि हमारे ऋषि-मुनि तो सदियों से पर्यावरा के प्रहरी रहे हैं। इसलिए अब संत समाज को पर्यावरण को बचाने का संकल्प लेकर कार्य करना होगा और इसमें हर संभव सहयोग देना हो।
स्वामी रुपेन्द्रा प्रकाश ने कहा कि आज पर्यावरण की दृष्टि से पृथ्वी की जो दशा है उसमें सुधार वांछनीय है। जिस प्रकार जन-जन ने पर्यावरण को प्रदूषित करने में अपनी भूमिका अदा की है। उसी प्रकार हर किसी को अब पर्यावरण को बचाने में अपना योगदान देना होगा। इसलिए सभी एकजुट होकर पर्यावरण को बचाने के लिए आगे आएं। सरकार को ऐसी नीतियां बनानी चाहिए कि बच्चों को किसी भी स्कूल में दाखिल तभी मिले जब उसके माता-पिता ने पांच पौधे लगा लिए हों और उसे डिग्री तब मिले जब उसने उन पौधों को वृक्ष का रूप दे दिया हो।
महामण्डलेश्वर ईश्वर दास जी ने कहा कि पेड़-पौधे हमारी धरा को सुंदरतो को चार चांद ही नहीं बनाते वरन वे हर तरह से हमारे हितैषी के रूप में काम करते हैं। इसलिए पेड़-पौधों की पर्यावरण संरक्षण में बहुत अधिक महत्ता है। जन-जन को अधिक से अधिक पेड़ लगाने पर जोर देना होगा। उन्होंने कहा कि वे सभी से आग्रह करते हैं अधिक से अधिक पेड़ लगाकर पर्यावरण संरक्षण को हो रहे नुकसान से बचाएं।
महंत जगतार मुनी जी ने कहा कि स्वामी सहजानंद सरस्वती ने पर्यावरण संकट को दूर करने के लिए संतों को एक मंच पर लाने का जो कार्य किया है वह सराहनीय है। आज पर्यावरण को गंभीरता से लिए जाने की अत्यंत आवश्यकता आन पड़ी है जिस गति से प्राकृतिक संसाधन घटते जा रहे हैं और प्राकृतिक आपदाएं व मौसमों में बदलाव हो रहे हैं वह पृथ्वी पर बड़े खतरे का संकेत दे रहे हैं। इससे उबरने के लिए पूरी मानव जाति को एकजुट होकर युद्धस्तर पर कार्य करना होगा। आज पर्यावरण दिवस पर अभी से यह संकल्प लें कि पृथ्वी व प्रकृति को बचाने के लिए हम पूर्ण रूप से समर्पित हैं और इसके लिए जो करना पड़े करेंगे।
मिशन ग्रीन फाऊंडेशन के संस्थापक ने कहा कि पर्यावरण को बचाने के लिए संत समाज को अपना उल्लेखनीय योगदान देना होगा। और सब संतों को आगे आना होगा। संतों में बड़ी ताकत है। संत चाहें तो अपने अनुयायिायों को आदेश देकर एक दिन में पर्यावरण को सुधार सकते हैं। पृथ्वी पर केवल मनुष्य का ही अधिकारी नहीं बल्कि सभी यह सभी जीव जन्तुओं का आश्रय स्थल है। पर्यावरण प्रदूषण से नाना प्रकार के जीव-जन्तुओं का जीवन भी खतरे में आ चुका है। इसलिए मानव ही नहीं बल्कि प्रत्येक जीव के लिए हमें पर्यावरण संरक्षण की दिशा में गंभीर कदम उठाने ही होंगे। उन्होंने वल्र्ड मेगा इन्वारमेंटल टॉ शो में भाग लेने व अपने विचार रखने पर सभी पूजनीय संतों का आभर व्यक्त किया और आग्रह किया पर्यावरण संरक्षण के जलाई गई इस मशाल को सदैव प्रज्जवलित रखना है।
स्वामी सहाजनंद ने कहा कि प्राचीन समय से संत ऋषि-मुनि पर्यावरण संरक्षण में अपना अतुलनीय योगदान देते आए हैं लेकिन वर्तमान में पर्यावरण की दुर्दशा को देखते हुए संत समाज की जिम्मेवारी अधिक बढ़ गई है इसलिए प्रकृति व पर्यावरण को बचाने के लिए उनका आगे आना जरूरी है। इसी उद्देश्य से इस मेगा इन्वारमेंटल टॉक शो का आयोजन किया है ताकि अधिक से अधिक लोगों तक संतों का संदेश व उनके विचार पहुंच सके और व्यापक स्तर पर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कार्य हो सके। यह टॉक शो 146 देशों में दिखाया गया है जिसमें सभी देशों के लोगों ने अपने गुरुओं से जुडक़र मार्गदर्शन प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि देश-विदेश के प्रसिद्ध संतों के करोड़ों अनुयायियों तक उनके संदेश पहुंचने से निश्चित तौर पर बदलाव आएगा और लोग पर्यावरण के प्रति गंभीरता से विचार करेंगे। पर्यावरण की जो विकट स्थिति वर्तमान में पूरे विश्व में बनी हुई है उससे उबरने के लिए व्यापक स्तर पर मुहिम चलाए जाने की जरूरत है जिसके लिए विश्व के प्रत्येक व्यक्ति का इसमें सहयोग होना जरूरी है। इसलिए सभी को पर्यावरण संरक्षण में अपना पूरा-पूरा योगदान देना चाहिए ताकि पर्यावरणीय संकटों से जूझ रही हमारी पृथ्वी को बचाया जा सके।

