जोगेंद्र मावी, ब्यूरो
हरिद्वार। पूर्व डीपीआरओ मो मुस्तफा खान की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी है। अब अतुल प्रताप सिंह ही हरिद्वार के जिला पंचायती राज अधिकारी यानि डीपीआरओ बने रहेंगे। खान की याचिका खारिज होने से विभागों में पनपे दलालों के मंसूबों पर पानी फिर गया है। यानि विभाग में होने जा रहे करीब 5 करोड़ का घोटाला होने से बच गया।
हरिद्वार के विकास भवन में डीपीआरओ की जिम्मेदारी अतुल प्रताप सिंह पर थी। लेकिन जैसे ही कैबिनेट का विस्तार हुआ तो अतुल प्रताप सिंह को निशाने पर लेते हुए हटाने की प्रक्रिया कर दी गई। उन्हें फर्जी शिकायतों के आधार पर शासन में संबद्ध करवा दिया गया। शिकायत थी कि विकास कार्यों की गति शिथिल थी। वे हाईकोर्ट पहुंचे और करीब दो महीने की सुनवाई के दौरान उन्हें फिर से हरिद्वार में डीपीआरओ की नियुक्ति मिली।

इस दौरान मो मुस्तफा खान का टिहरी से तबादला कर हरिद्वार का चार्ज सौंप दिया गया। इस दौरान वे अपने चहेते ठेकेदार को हरिद्वार में सोलर लाइटों को लगवाने का ठेका दिलवाने में कामयाब रहे। यही नहीं जीएसटी का मामला भी चर्चाओं में रहा।
अब बिना खरीद के ही लाइटों का भुगतान ठेकेदार को कराने के मामले में एक ग्राम पंचायत विकास अधिकारी अनुज शर्मा को लक्सर ब्लॉक में अटैक करने के मामले में विभाग में पनपे दलालों के मंसूबों पर पानी फिर गया। हालांकि अनुज शर्मा खरीद के लिए टेंडर प्रक्रिया और आदेश की प्रति नहीं दिखा सके। टेंडर की प्रक्रिया कैसे हुई वे प्रथम, द्वितीय, तृतीय किसने टेंडर भरा, कोई प्रक्रिया नहीं हुई और ठेकेदार को बिना लाइट लगे ही पूरा भुगतान कर दिया गया।
अब मो मुस्तफा खान सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए थे, तो अपना पक्ष डीपीआरओ अतुल प्रताप सिंह ने भी रखा। जिसमें मुस्तफा खान की याचिका निरस्त हो गई। अब डीपीआरओ अतुल प्रताप सिंह ही बने रहेंगे। इससे अतुल प्रताप सिंह की खिलाफत करने वालों और विभाग में सक्रिय हुए दलालों को मुंह की खानी पड़ी है।

