जोगेंद्र मावी, ब्यूरो
हरिद्वार। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की बढ़ती लोकप्रियता और प्रदेश के समुचित विकास में बाधा बनने का काम अपने ही पार्टी के सांसद कर रहे हैं। पूर्व सीएम की फिर से मुख्यमंत्री बनने की इच्छा जाग उठी है। पूर्व सीएम ने अपने पुराने मित्र पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत को साजिश में साथ देने के लिए शामिल कर लिया है। साथ ही लगातार कई कथित प्रकरणों को उजागर भी करवा रहे हैं। पूर्व सीएम मुख्यमंत्री बने या न बने, लेकिन उनकी दूसरी चाहत अपने खेमे के विधायकों को कैबिनेट मंत्री बनवाने के साथ नेताओं को एडजस्ट कराने की है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सक्रियता, जनताहित में लगातार काम करने, आमजन में पैठ बनाकर काम कर रहे हैं। प्रदेश में आपदा के दौरान पीड़ितों के बीच पहुंचकर उनकी हर संभव मद्द करवा रहे हैं। उनकी बढ़ती लोकप्रियता से पार्टी के दो सांसद असहज नजर आ रहे हैं। पिछले कुछ महीनों से दोनों सांसद खुलेआम साजिश रचने का काम कर रहे हैं। दिल्ली में हाईकमान के कानों में कानाफूसी कर रहे हैं। दिल्ली में हुई एक बैठक से निकल जाने के बाद तो बड़ी चर्चा सामने आई है। उन्होंने चर्चाओं में आने के लिए सोची समझाी साजिश के तहत बैठक से निकलने का निर्णय लिया। पूर्व सीएम एवं सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत अपने समर्थकों से धामी सरकार को बदनाम करने में लग गए हैं। टीएसआर फैन क्लब पेज के माध्यम से अवैध खनन, अंकिता हत्याकांड में वीआईपी का नाम, जितेंद्र आत्महत्या के साथ तमाम कथित प्रकरणों के साथ यहां तक की कई बार सरकारी तंत्र पर भी निशाना साधकर धामी सरकार को पूरी तरह से बदनाम करने में लगे हैं।

अब पूर्व सीएम ने अपने पुराने खास मित्र पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत को भी धामी सरकार को बदनाम कराने के काम में लगा लिया है। हरक सिंह रावत प्रतिदिन कई बार इंटरव्यू देकर भाजपा की सरकार को बदनाम करने के लिए तमाम आरोप लगाते हुए खुलासे करने का दावा करते हैं। सत्यता के लिए अपने को उन प्रकरणों में शामिल होने का दावा तक करते हैं, ताकि जनता को असलियत लगे। हालांकि पूर्व सीएम के समय में हुए घोटालों को विधायक उमेश कुमार लगातार उठा रहे हैं, शेयर में इन्वेस्ट कराने एवं प्रकरणों में एसआईटी जांच बैठाने से वे बौखलाए हुए हैं।
फैन क्लब पेज से उठवा रहे दोबारा से सीएम बनने की मांग
टीएसआर फैन कल्ब के साथ तमाम ऐसे सोशल पेज बनवाए गए हैं, जिन पर मुख्यमंत्री धामी को बदनाम कर त्रिवेंद्र को दूरदर्शी मुख्यमंत्री बताया गया है। साथ ही उन्हें दोबारा से मुख्यमंत्री बनाने की मुहिम चलवाई जा रही है।
जैसे बीच में वे बदले थे
पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को सरकार के चार साल पूरे होने यानि एक साल पहले ही हाईकमान ने हटा दिया था। एक चैनल के द्वारा कराए गए सर्वे में वे सबसे बैक मुख्यमंत्री साबित हुए थे। अब वे चाहते हैं कि जैसा दाग उनके दामन पर लगा है, इसी प्रकार का धामी सरकार पर भी लगे।

