जोगेंद्र मावी, ब्यूरो

हरिद्वार। महंत सुधीर गिरि हत्याकांड में आशीष शर्मा उर्फ टुल्ली को रुड़की कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। टुल्ली ने अरबपति बनने के लिए महंत की हत्या कराई थी। अब टुल्ली रुड़की जेल में बंद रहेगा, हालांकि अभी टुल्ली रुड़की कोर्ट के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करेगा।

शर्मा कंस्ट्रक्शन कंपनी का स्वामी आशीष शर्मा उर्फ टुल्ली (पुत्र सुभाष चंद्र शर्मा निवासी मोहल्ला म्याना, कनखल, हरिद्वार) कई वर्ष से महानिर्वाणी अखाडे़ में बतौर मुंशी कार्यरत था।

अखाडे़ के संतों से कम दामों में भूमि खरीदकर वह महंगे दामों में बेचता था। कॉलोनियों, अपार्टमेंट और दुकानें आदि बनाकर भी बेचता रहता था।

वर्ष 2004 में संत सुधीर गिरि ने सस्ते रेट में भूमि देने का विरोध किया। दोनों में इस बात को लेकर तकरार भी हुई और आशीष शर्मा को मुंशी पद से हाथ धोना पड़ा।

2006 में टुल्ली ने अखाड़े में वापसी की

वर्ष 2006 में टुल्ली ने फिर मुंशी के तौर पर अखाडे़ में वापसी की। एसएसपी ने बताया कि कुछ समय बाद टुल्ली ने स्वेच्छा से मुंशी पद छोड़ दिया। लेकिन रंजिश बरकरार रही।

टुल्ली ने अपने परिचित प्रॉपर्टी हाजी नौशाद (पुत्र मसीतुल्ला निवासी मॉडल टाउन, सरकुलर रोड, सिविल लाइन, मुजफ्फरनगर) से संपर्क साधा।

उसने टुल्ली की मुलाकात शूटर इमत्याज उर्फ जुगनू (पुत्र अशफाक निवासी खालापार रहमतनगर आजा मॉन्टेसरी स्कूल के पास मुजफ्फरनगर) और महताब उर्फ काला उर्फ शानू (पुत्र अनीस निवासी सूजडडू चुंगी मॉडल टाउन सिविल लाइन मुजफ्फरनगर) से कराई।

2012 में गोलियों से भूनकर कर दी थी

घटना से कई माह पूर्व तक शूटर महताब एवं इमत्याज बतौर ड्राइवर के तौर पर प्रॉपर्टी डीलर टुल्ली के साथ रहे और 14 अप्रैल 2012 को कनखल से पीछा करते हुए बेलड़ा गांव पहुंचने पर कार में सवार महंत सुधीर गिरि की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी।

हरिद्वार रुड़की कोर्ट ने आज महंत सुधीर गिरी हत्या कांड में दोषी ठहराए गए सभी आरोपियों को कठोर सजा सुनाई है। प्रॉपर्टी डीलर आशीष शर्मा उर्फ टुल्ली के साथ दो आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा के साथ 50_ 50,000 का जुर्माना लगाया गया है ,अन्य आरोपियों को भी अलग-अलग सजा सुनाई गई है।

कोर्ट द्वारा सुनाया गया फैसला

64- दोषसिद्ध अभियुक्तगण इम्तियाज उर्फ जुगनू व महताब उर्फ शानू प्रत्येक को भारतीय दण्ड संहिता की धारा 302 एवं धारा 120बी / 302 के अपराध के लिए सश्रम आजीवन कारावास की सजा एवं मु0 50,000-50,000/- रूपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया जाता है। अर्थदण्ड की धनराशि अदा न करने पर दोषसिद्धगण एक-एक वर्ष के अतिरिक्त साधारण कारावास की सजा भोगेंगे।

65- दोषसिद्ध अभियुक्त आशीष शर्मा उर्फ टुल्ली को भारतीय दण्ड संहिता की धारा 120बी / 302 के अपराध के लिए सश्रम आजीवन कारावास की सजा एवं मु0 50,000/- रूपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया जाता है। अर्थदण्डः की धनराशि अदा न करने पर दोषसिद्ध एक वर्ष के अतिरिक्त साधारण कारावास की सजा भोगेगा।

66- दोषसिद्ध अभियुक्त हाजी नौशाद को भारतीय दण्ड संहिता की धारा 216 के अपराध के लिए पांच वर्ष के सश्रम कारावास की सजा एवं मु० 20,000/- रूपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया जाता है। अर्थदण्ड की धनराशि अदा न करने पर दोषसिद्ध तीन माह के अतिरिक्त साधारण कारावास की सजा भोगेगा।

67- दोषसिद्ध अभियुक्तगण इम्तियाज उर्फ जुगनू व महताब उर्फ शानू प्रत्येक को आयुध अधिनियम की धारा 25 के अपराध के लिए तीन-तीन वर्ष के सश्रम कारावास की सजा एवं मु0 25,000-25,000/- रूपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया जाता है। अर्थदण्ड की धनराशि अदा न करने पर दोषसिद्धगण तीन-तीन माह के अतिरिक्त साधारण कारावास की सजा भोगेंगे।