अवैध खनन की सांकेतिक फोटोखनन की सांकेतिक फोटो

जोगेंद्र मावी, ब्यूरो
हरिद्वार। इस समय हरिद्वार तहसील में अवैध खनन पूरे चरम पर है। कटारपुर से लेकर भोगपुर तक गंगा से पत्थर निकालकर स्टोन क्रशरों पर पहुंचाया जा रहा है। इस अवैध तरीके से पहुंचाई जा रही सामग्री से ही क्रशरों का संचालन हो रहा है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि पूरे क्षेत्र में एक भी पट्टा आवंटित नहीं है। इस अवैध खनन से खनन माफिया के साथ अधिकारी भी मालामाल हो रहे हैं। इस अवैध खनन में एसडीएम के साथ खनन बाबू प्रदीप कुमार की भूमिका सबसे संदिग्ध है। सूत्रों की माने तो पुलिस भी मोटी रकम वसूल रही है।
हरिद्वार तहसील क्षेत्र में पिछले साल फरवरी महीने में हाईकोर्ट के आदेश पर पट्टे बंद करा दिए गए थे। हाईकोर्ट में जवाब दाखिल करने के लिए सभी खनन के पट्टे, रीवर ट्रेनिंग के सभी पट्टे बंद करा दिए गए थे। वैध खनन न होने से हरिद्वार तहसील में स्टोन क्रशर पूरी तरह से बंद हो जाने चाहिए थे, लेकिन अवैध खनन से स्टोन क्रशरों का पूरा साम्राज्य रात दिन चल रहा है। कटारपुर से लेकर भोगपुर तक रात दिन हजारों की संख्या में बुग्गियों के माध्यम से अवैध तरीके से गंगा से पत्थर निकालकर बेचा रहा है। कटारपुर के आसपास कुछ खेतों में अवैध तरीके से पत्थर निकालकर बेचा रहा है। इस भी अवैध खनन करने वालों की पहुंच इतनी बड़ी है कि हाथ डालने से भी प्रशासन घबराता है। इसी का फायदा उठाते हुए अधिकारी इनसे मोटी रकम वसूल रहे हैं। इस अवैध खनन के खेल से कारोबारी मालामाल हो रहे हैं। जब कोई सवाल उठाता है तो अधिकारी पूरी तरह से सफाई देते हुए दिखते है। जबकि इस खनन के खेल में हरिद्वार के एसडीएम, खनन बाबू की संलिप्तता जग जाहिर है। शिकायत पर किसी का स्टोन क्रशर या स्टोन सील भी कर देते हैं तो मोटी रकम वसूलकर उसे क्लीन चिट दे देते हैं।