जोगेंद्र मावी, ब्यूरो
हरिद्वार। एसडीएम पूरण सिंह राणा के नाम से संत की निकली विवादित भूमि, को गलत तरीके से प्रसारित कराया गया, जबकि एसडीएम ने दोनों पक्षों के डाक्यूमेंट जांच करते हुए रिपोर्ट जिलाधिकारी को प्रेषित करने की बात कही थी। उन्होंने सिविल कोर्ट के सीनियर जज के आदेश का पालन कराते हुए शांति व्यवस्था कायम कराई थी। इसी मामले में भूमि से हटाए गए मंदिर और लूट के मामले को नगर कोतवाली पुलिस ने कतई गंभीरता से नहीं लिया है।
इंद्रापुरम गाजियाबाद निवासी समीर गुप्ता पुत्र रणधीर गुप्ता ने एक अक्तूबर— 2009 को रंजन त्यागी पुत्र देवेश्वर त्यागी निवासी भूपतवाला कलां मुख्तारेआम मस्तराम पुत्र दुलीचंद निवासी भूपतवाला कलां से खरीदी। कुल धनराशि 22,50,000 में 375 वर्ग मीटर भूमि की रजिस्ट्री नंबर 7146 पर खरीदी गई।

समीर गुप्ता का कहना है कि वे निरंतर अपनी भूमि पर आते रहे और साफ सफाई कराते रहे हैं। जिस समय भूमि खरीदी उसी समय चाहरदीवारी कराई गई। अब समीर गुप्ता ने 3 अप्रैल—2023 को बगलामुखी मंदिर का निर्माण शुरू कर दिया था। मंदिर में विधि विधान से 400 किलोग्राम की सगमरमर की बगलामुखी की प्रतिमा और शिवलिंग स्थापित कराया।
इस भूमि पर देवीदयाल शुक्ल ने अपना मालिकाना अधिकार बताया। जिस पर दोनों पक्षों का मामला सिविल कोर्ट हरिद्वार में विचाराधीन हो गया। सीनियर सिविल जज राहुल कुमार श्रीवास्तव ने समीर गुप्ता के पक्ष में स्टे दिया और दूसरी पार्टी देवीदयाल को भूमि से दूर रहने और समीर के द्वारा चलाए जा रहे निर्माण में कोई हस्तक्षेप न करने का आदेश दिया।
11 अप्रैल को समीर गुप्ता के परिजन आए तो देखा कि मंदिर गायब था, वहां पर शिवलिंग भी विक्षत मिला। तो समीर के परिजन वीर विक्रम सिंह ने 11 अप्रैल को ही नगर कोतवाली में तहरीर दी। आरोप लगाया कि भूमि पर स्थापित मंदिर को देवीदयाल शुक्ल व भाजपा के पार्षद अनिल मिश्रा के भाई सुनील मिश्रा दर्जन भर लोगों ने लूट लिया है। तहरीर पर मुकदमा दर्ज नहीं किया गया।
मामले में 12 अप्रैल को पीड़ित पक्ष समीर गुप्ता के परिजन और अधिवक्ता एसएसपी हरिद्वार अजय सिंह से मिले और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करने की मांग उठाई।

इस मामले में अचानक से जिला प्रशासन की ओर से एसडीएम पूरण सिंह राणा, तहसीलदार, लेखपाल भूमि की पैमाइस और जांच के लिए पहुंच गए। मामले में एसडीएम पूरण सिंह राणा ने दोनों पक्षों के डाक्यूमेंट्स की जांच करते हुए पैमाइस भी कराई।
करीब आधे घंटे की मौजूदगी में एसडीएम पूरण सिंह राणा ने बताया था कि रिपोर्ट जिलाधिकारी को प्रेषित की जाएगी।
जबकि खबरें एसडीएम के माध्यम से प्रसारित हुई कि भूमि समीर गुप्ता की नहीं, बल्कि देवीदयाल की है।
खबरों के प्रसारित होने से पीड़ित समीर गुप्ता एवं परिजनों के साथ समर्थक बेहद मायूस हो गए हैं। वे जल्द ही कोर्ट में अपील करेंगे।

