जोगेंद्र मावी, ब्यूरो
हरिद्वार। विधानसभा—2027 के चुनाव में अब मात्र चार महीने का समय शेष रह गया है, तो जनप्रतिनिधियों को जनता की याद वोटों के लिए आने लगी है। जो विधायक पौने पांच साल तक एक विशेष समुदाय के लिए काम करती रही उन्हें अब दूसरे समुदायों की याद आने लगी है। क्षेत्रीय जनता समस्याओं से रूबरू होती रही और विधायक को बुलाती रही, लेकिन विधायक उनके बीच नहीं पहुंची।
मामला हरिद्वार ग्रामीण विधानसभा का है। क्षेत्र में कांग्रेस की विधायक अनुपमा रावत है। विधायक ने ग्राम कांगड़ी में अपना चुनावी कार्यालय खोला है। वे रविवार को प्रेसवार्ता करने पहुंची। जलभराव से जूझ रहे स्थानीय लोगों को पता चला कि विधायक आईं हुई तो घरेलू महिलाएं उनसे मिलने पहुंच गई। उन्होंने अपनी जलभराव की समस्या से निजात दिलाने की मांग उठाई तो विधायक बौखला गईं। यहां तक कि स्थानीय लोगों ने जलभराव के दौरान फोन किए, लेकिन वह उनके बीच नहीं पहुंची।

यह था मामला
ग्राम कांगड़ी की कुछ कॉलोनियों में जलभराव की समस्या है। पानी की निकासी की व्यवस्था कराने को लेकर उन्होंने कांग्रेस की विधायक को फोन किए, लेकिन पूरे पौने पांच साल तक उनके बीच नहीं पहुंच सकी। जब विधायक उनके गली के पास बनाए अपने कार्यालय में चुनाव के चार महीने पहुंची तो वे अपनी समस्या बताने पहुंच गई, लेकिन विधायक ने उन्हें अनसुना कर दिया।
अपनी बात न सुनने पर आक्रोशित महिलाओं ने विधायक के खिलाफ जमकर नारेबाजी करने शुरू कर दी। प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों का आरोप है कि वे पिछले दो वर्षों से क्षेत्र में हो रहे गंभीर जलभराव से परेशान हैं, लेकिन क्षेत्रीय विधायक एक बार भी उनकी सुध लेने नहीं आईं।

ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के दौरान हाईवे का पूरा पानी गांव और उनकी गलियों में भर जाता है। इससे घरों में रखा सारा सामान खराब हो जाता है। मामले को बढ़ता देख विधायक अनुपमा रावत ने विरोध कर रही महिलाओं के बीच पहुंची तो उन्हें धमकी के अंदाज में शांत रहने को चेतावनी देने लगी। कोई जवाब नहीं मिलता देख महिलाओं ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी यतीश्वरानंद जिंदाबाद के नारे लगाने शुरू कर दिए।
आक्रोशित महिलाओं ने कहा कि यदि उनके बीच में मुस्लिम समाज के घर होते तो उनके बुलावे पर तत्काल पहुंच जाती, लेकिन हमारी समस्याओं से उनका कोई वास्ता नहीं है। उन्होंने कहा कि जो गलती उन्होंने पिछले चुनाव—2022 में की, इस बार नहीं करेंगे। अपने को पहाड़ की बेटी बताने वाली को केवल उनके वोट चाहिए, उनकी समस्याओं को कोई वास्ता नहीं रखा।

