जोगेंद्र मावी, ब्यूरो
हरिद्वार। अशोका, नाम तो सुना होगा। हरिद्वार में फिलहाल ऐसा कोई नेता है जो पीड़ितों की आवाज बनकर सीना तानकर खड़ा हो जाता है वह है अशोक शर्मा। हरिद्वार में महिला अस्पताल में हुआ प्रकरण सभी के सामने है, प्रसव के लिए पहुंची महिला को किस कदर डॉक्टर ने परेशान किया, उसका जीवंत उदाहरण सामने है। हमेशा की तरह टाल मटोल करना वाला प्रशासन ने जांच कराकर कार्रवाई का दावा कर दिया था, लेकिन जिस तरह से अशोक शर्मा अपने साथियों के साथ महिला अस्पताल पहुंचे और डॉक्टर को लज्जित किया, उससे जिला प्रशासन तत्काल हरकत में आ गया और कार्रवाई करते हुए डॉक्टर की सेवा समाप्त कर दी।
अशोक शर्मा के बारे में कोई अंजान होगा जो उन्हें और उनकी कार्यशैली को नहीं जानता। अशोक शर्मा ने हमेशा पीड़ितों की लडाई लड़ी और कई बार जन प्रतिनिधि बनें। उनके जनता की आवाज बनने पर उनकी पत्नी अनीता शर्मा को जनता ने 2018 में मेयर बनाकर ईनाम दिया। हालांकि उनके समय में विपक्षी पार्टी की सरकार थी। जोकि उनके बढ़ते प्रभाव को कम कराने के बहाने ढूंढती रही। अशोक शर्मा काम न करने वाले अधिकारियों के खिलाफ हमेशा से ही रहे हैं।

अब फिर से वे चर्चाओं में आए हुए हैं। कारण जनता को परेशान करने वाले और जनता की समस्याओं पर काम न करने वाले अधिकारियों को वे अपने गांधीवादी तरीके से हिला रहे हैं। वे जनता के लिए अधिकारियों के पैरों में गिरकर काम कराने की गुहार लगा रहे हैं। उनके इस तरीके पर राजा गार्डन के पार्षद सुमित त्यागी ने भी काम किया और जल संस्थान के अधिकारियों को सम्मानित कराकर एहसास कराया कि जिस जनता के लिए अधिकारी बने हो उनके लिए काम करो।
सत्ताधारी नेता भी परेशान
हालांकि परेशान तो सत्ताधारी पार्टी के भी लोग है, वे केवल दबी आवाज में बोलते तो हैं, लेकिन कुछ नहीं कर सकते। अशोक शर्मा के द्वारा महिला अस्पताल में किए गए प्रदर्शन की चर्चा इतनी फैल गई कि भाजपा के नेताओं ने भी उनकी पोस्ट को शेयर किया।
यदि किसी की समस्या का समाधान अधिकारी नहीं कर रहे हैं तो अशोक शर्मा को कांटेक्ट करें, ताकि उसका निवारण तत्काल हो जाए।

