जोगेंद्र मावी, ब्यूरो
पटवारी या लेखपाल। इन्होंने तो भर्ती होते समय ही कसम खाई थी कि बिना रिश्वत के कोई काम नहीं करेंगे। रिश्वतकांड में सबसे अधिक मामले भी लेखपालों के आते हैं, लेकिन ये नहीं सुधर रहे। महिलाओं से उम्मीद की जाती है कि ये ईमानदारी से काम करेंगी, लेकिन नहीं।
विजिलेंस ब्यूरो ने खरखौदा में एक महिला ब्लॉक पटवारी को 20 हजार रुपये की रिश्वत लेने के मामले में पकड़ा है। सुदेश पर यह कार्रवाई गांव सिसाना निवासी अनिल की शिकायत के आधार पर की गई है। आरोप है कि ब्लॉक पटवारी सुदेश ने पंचायती जमीन का मालिकाना हक दिलवाने के बदले 20 हजार रुपये की मांग की थी।
सिसाना गांव निवासी अनिल ने बताया कि उनका 450 गज का एक पंचायती प्लॉट है। प्लॉट पर परिवार का पिछले करीब 25 साल से कब्जा चला आ रहा है। हरियाणा में मालिकाना हक योजना के नियमों के अनुसार जिस जमीन पर 20 साल या उससे अधिक काबिज है, उस पर सरकार द्वारा निर्धारित राशि जमा कराकर उसकी रजिस्ट्री करा सकता है। इसी योजना के तहत फाइल तैयार कराई गई थी। अनिल पटवारी सुदेश के पास गया तो उसने कहा कि बिना रिश्वत के काम नहीं होगा। उसने 25 हजार रुपये की मांग रखी। बाद में 20 हजार रुपये में तय हुई।
शिकायत की गंभीरता को देखते हुए विजिलेंस रोहतक की टीम ने पूरे मामले की प्राथमिक जांच की और आरोप सही पाए जाने पर जाल बिछाया गया। तय योजना के अनुसार रिश्वत की राशि बीडीपीओ कार्यालय के अंदर ही संचालित की जा रही एक चाय वाले को दी गई, जहां से आगे लेन-देन होना था। जैसे ही यह प्रक्रिया पूरी हुई, मौके पर मौजूद विजिलेंस टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पटवारी सुदेश को पकड़ लिया। इस कार्रवाई को एसवी एंड एसीबी रोहतक की टीम द्वारा अंजाम दिया गया।
गिरफ्तारी के बाद आरोपी पटवारी से पूछताछ की जा रही है और रिश्वत से जुड़े सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है। टीम द्वारा संबंधित रिकॉर्ड और दस्तावेज भी खंगाले जा रहे हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस तरह की गतिविधियों में और कोई व्यक्ति तो शामिल नहीं है। विजिलेंस की इस कार्रवाई से क्षेत्र के सरकारी कार्यालयों में हड़कंप मचा हुआ है।

