जोगेंद्र मावी, ब्यूरो
हरिद्वार। कांग्रेस प्रत्याशी पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के बड़े पुत्र विरेंद्र सिंह रावत को 1,64,056 वोटो से शिकस्त मिली है। विरेंद्र सिंह रावत को 14 विधानसभाओं में से 6 में ही जीत मिली, जबकि 8 विधानसभाओं में हार का सामना करना पड़ा। इन 8 विधानसभा में एक विधानसभा हरिद्वार ग्रामीण विधानसभा भी है, जिसकी विधायक विरेंद्र सिंह रावत की बहन है। उस विधानसभा में 4851 मतों से हार मिली है। अब क्षेत्र में विधायक की कार्यशैली पर सवाल उठना लाजमी है या फिर कुछ पारिवारिक कारण।
भाजपा प्रत्याशी पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को 6,53,808 (छह लाख 53 हजार 808) वोट मिले, जबकि विरेंद्र सिंह रावत को 4,89,752 वोट मिले। विरेंद्र सिंह रावत को हरिद्वार जिले की 6 विधानसभाओं में जीत मिली हैं। जिनमें मंगलौर, भगवानपुर, झबरेड़ा, पिरान कलियर, ज्वालापुर और लक्सर विधानसभा है। लक्सर विधानसभा में बहुजन समाज पार्टी के विधायक शहजाद अली है।
मंगलौर विधानसभा में 23,001 मतों से, भगवानपुर से 9563 मतों से, झबरेड़ा से 4264 मतों से, लक्सर से 2812 मतों से, ज्वालापुर में 9610 मतों से, पिरान कलियर में 18,190 मतों से जीते हैं। लेकिन अन्य विधानसभाओं में बुरा हाल रहा।
विरेंद्र सिंह रावत की बहन विधायक अनुपमा रावत हरिद्वार ग्रामीण विधानसभा से विधायक है, लेकिन उनके प्रचार प्रसार में कोई योगदान नहीं रहा। इसका जीता जागता उदाहरण हरिद्वार ग्रामीण विधानसभा में सामने आया है। विरेंद्र रावत को बहन की विधानसभा में हार का सामना करना पड़ा। उन्हें 42475 मत मिले, जबकि त्रिवेंद्र सिंह रावत को 47326 मत मिले। विरेंद्र सिंह रावत को 4851 मतों से हारना पड़ा। जबकि कांग्रेस के नेताओं को उम्मीद थी कि जिस विधानसभा पर बहन का कब्जा हो, वहां तो एक तरफा मत पड़ने चाहिए थे।
कांग्रेस के पूर्व प्रदेश प्रवक्ता एवं प्रत्याशी के मीडिया प्रभारी मनीष कर्णवाल का कहना है कि हरिद्वार ग्रामीण विधानसभा में मत कम क्यों निकले, यह तो जनता के बीच में जाकर ही पता करना पड़ेगा।

