जोगेंद्र मावी, ब्यूरो
भाई के अपराध में पुलिस ने बहन और भांजे को हिरासत में लेकर पीटा। महिला को इस बेरहमी से पीटा की वह बेहोश तक हो गई। जब महिला छूट कर आई तो गांव वालों के सामने पुलिस द्वारा बेइज्जत करने और पुलिस की मार के डर से उसने जान दे दी।
अलीगढ़ में दादों क्षेत्र के गांव लहरा से महिला के अपहरण मामले में आरोपी की बहन लक्ष्मी देवी (46) ने पुलिस उत्पीड़न और कार्रवाई की दहशत में 29 मार्च रात आत्महत्या कर ली। आरोप है कि महिला और उसके बेटे को हिरासत में लेकर पुलिस ने मारपीट की थी और फिर आने की धमकी देते हुए छोड़ा था। घटना के बाद 30 मार्च सुबह ग्रामीणों ने छह घंटे तक शव नहीं उठने दिया और हंगामा किया। हंगामे-नोकझोंक व खींचतान के बीच ग्रामीण एसओ सहित पुलिस टीम पर मुकदमा दर्ज करने और मृतका के परिवार को मुआवजा देने की मांग कर रहे थे। दोपहर में एसएसपी के एसओ को लाइन हाजिर करने और अन्य पुलिस कर्मियों की भूमिका की जांच करने के आश्वासन पर ग्रामीण माने। इसके बाद पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। एसएसपी ने मामले की जांच एसपी देहात को सौंप दी है।

घटनाक्रम के अनुसार गांव लहरा की महिला मीना को 28 मार्च रात पड़ोसी गांव नगला जीवराम का आरोपी प्रेमी छोटे उर्फ याकेश तमंचे के बल पर अगवा कर ले गया था। विरोध करने पर परिवार की महिलाओं से मारपीट की थी। शनिवार सुबह महिला खेत में बेहोश मिली थी। इसी घटना में दर्ज मुकदमे के आधार पर छोटे की तलाश में लगी दादों पुलिस उसकी बहन लक्ष्मी देवी के गांव पालीमुकीमपुर के भोजपुर हरनोट पहुंची। वह उस समय खेत पर गेहूं काट रही थी। आरोप है कि पुलिस खेत से ही लक्ष्मी देवी और उसके छोटे बेटे लोकेश को घसीटती व पीटती हुई गाड़ी में डालकर ले गई। थाने ले जाकर भी मां-बेटे को पीटा गया। रात दस बजे ग्राम प्रधान प्रतिनिधि पप्पू सिंह यादव के दखल पर दोनों को उनकी सुपुर्दगी में छोड़ा गया। साथ ही सुबह दस बजे फिर थाने आने की बात कही थी। घर पहुंची लक्ष्मी पुलिस की दहशत और बेइज्जती से आहत थी, शनिवार रात में उसने किसी समय घर से कुछ दूरी पर पेड़ पर फंदे से लटककर आत्महत्या कर ली।
30 मार्च सुबह पेड़ से लटका उसका शव देख ग्रामीण भड़क गए और उन्होंने पुलिस के खिलाफ जमकर हंगामा किया। सूचना पर थाना पाली मुकीमपुर पुलिस ही मौके पर पहुंची। हंगामा बढ़ने पर एसपी देहात, सीओ छर्रा, सीओ इगलास सहित कई थानों का फोर्स पहुंच गया। दोपहर डेढ़ बजे एसओ योगेंद्र कुमार के लाइन हाजिर करने व जांच के आधार पर अन्य कार्रवाई के आश्वासन पर ग्रामीण माने। देर शाम पोस्टमार्टम के बाद शव वापस गांव भेज दिया गया है।
ग्रामीणों के सामने किया था बेइज्जत मुकदमे से बचाने के मांगे एक लाख
इलाका पुलिस के खिलाफ ग्रामीणों का गुस्सा यूं ही नहीं भड़का। मां के आत्महत्या करने के बाद बेटे ने ग्रामीणों को बताया कि मामा पर दर्ज मुकदमे से बचाने के लिए एसओ ने उससे एक लाख रुपये मांगे थे। यह सुनकर ग्रामीण भड़क गए। इनका कहना था कि भाई के किसी अपराध में विवाहित बहन को पुलिस क्यों सता रही।
इसके बाद जमकर हंगामा हुआ और मौके पर पहुंची पालीमुकीमपुर थाना पुलिस से नोकझोंक हुई। बाद में अधिकारी जब आए तो उनके सामने भी मृतका के बेटे ने उनके सामने भी यह तथ्य रखे। हुआ यूं कि शनिवार दोपहर में दादों पुलिस हरनोट से लक्ष्मी देवी व उसके बेटे को ले जा रही थी। तब महिला ने ऐतराज किया था। बेटे लोकेश ने बताया कि उसी समय ग्रामीणों के सामने पुलिसकर्मियों ने उसे थप्पड़ जड़ा था। इससे वह बेहोश हुई तो उसे पानी पिलाया गया। बाद में पुलिस ने घसीटकर जीप में मां-बेटे को चढ़ाया। यहां से पहले उसे आरोपी भाई के घर नगला जीवाराम ले गई। वहां से अपहरण पीड़िता के गांव लहरा ले गई। फिर थाने ले जाकर पीटा गया। जब उसे पीटा गया, तब अपहरण पीड़िता के परिवार के लोग वहां खड़े थे। देर शाम जब वह थाने से वापस आई तो उसने ग्राम प्रधान सहित कुछ अन्य ग्रामीणों से मदद मांगते हुए यह कहा कि थानेदार ने मुकदमे से बचाने के लिए एक लाख रुपये मांगे हैं। मगर कहीं से धन की मदद नहीं हुई। बल्कि ग्रामीणों ने ये उलाहना दिया कि भाई के अपराध पर बहन की बेइज्जती हो रही है। सुबह दस बजे पुलिस ने फिर से थाने बुलाया है। बस इसी बात से महिला आहत हो गई। रात में वह घर से पचास कदम की दूरी पर पेड़ के नीचे चारपाई डालकर सो गई। रात में किसी समय उसने आत्महत्या कर ली।

पुलिस से शव छीन लाए ग्रामीण
छह बजे आत्महत्या का शोर मचने पर शुरुआत में एसओ पाली व आसपास के कुछ थानों का फोर्स सीओ छर्रा की अगुवाई में गांव में आ गया था। ग्रामीण पुलिस टीम पर मुकदमा व मुआवजे की मांग कर रहे थे। इस पर 11 बजे करीब सीओ ने समझाया कि शव पोस्टमार्टम के लिए जाने दो। तभी सभी कार्रवाई होंगी। इस बीच पुलिस ने शव गाड़ी में रखकर रवाना किया। गाड़ी कुछ दूरी चली थी कि ग्रामीण आगे आए गए और शव को छीनकर ले गए और उसे घर पर रख दिया। फिर घर पर लाकर रख दिया। यहां खुद लक्ष्मी के पति ने सीओ के पांव छूकर न्याय दिलाने का अनुरोध किया। कहा कि भाई के अपराध पर विवाहित बहन के साथ इतना अन्याय किया है। तभी एसपी देहात ने पहुंचकर उन्हें समझाया व भरोसा दिलाया। समाजसेवी प्रेमश्री यादव ने भी परिवार के समक्ष बात रखी। उसके बाद ही दोपहर में ग्रामीण करीब डेढ़ बजे शव पोस्टमार्टम के लिए को भेजने को राजी हुए।
कड़ी सुरक्षा में अंतिम संस्कार, हाल बेहाल
शाम को तीन चिकित्सकों के जरिये महिला के शव का पोस्टमार्टम कराया गया। जिसमें मृत्यु का कारण फंदा लगाकर आत्महत्या करना आया। इसके बाद शव जब गांव पहुंचा तो कई थानों की पुलिस फोर्स की निगरानी में शव का अंतिम संस्कार किया गया। इस बीच पति व तीन बेटों का हाल बेहाल था। छोटा बेटा लोकेश तो अंतिम संस्कार के समय बेहोश हो गया।
महिला ने बेइज्जती में उठाया कदम, देखे जाएंगे सीसीटीवी
अलीगढ़ एसपी देहात अमृत जैन ने बताया कि लहरा की महिला के अपहरण मामले में मृतक लक्ष्मी देवी के भाई पर दर्ज मुकदमे में अज्ञात में उसके बहनोई की भूमिका सामने आई थी। पुलिस उसे पूछताछ के लिए बुलाने गई थी। पुलिस के पहुंचने पर वह छिप गया। तब महिला को थाने लाते समय ग्रामीणों के समक्ष बेइज्जत किया गया।
थाने में मारपीट नहीं हुई। बल्कि उसे महिला डेस्क पर सीसीटीवी की निगरानी में रखा गया। फिर भी जांच की जा रही है। अन्य पुलिसकर्मियों में एक महिला सिपाही व तीन अन्य सिपाहियों की भूमिका पर सवाल हैं। उन्हें भी जांच में शामिल किया गया है। अगर परिवार तहरीर देगा तो उसे भी जांच का हिस्सा बनाया जाएगा। अपहरण के आरोपियों को भी तलाशा जा रहा है।