जोगेंद्र मावी, ब्यूरो
हरिद्वार। उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय में आयोजित “केदारमानस पञ्चाङ्ग” संशोधन त्रिदिवसीय कार्यशाला का विधिवत समापन हो गया। तीन दिन तक चली विद्वानों के विमर्श की इस महत्त्वपूर्ण कार्यशाला में देश के दिग्गज ज्योतिषियों ने प्रतिभाग किया। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय देवप्रयाग परिसर के निदेशक प्रोफेसर पीवीबी सुब्रह्मण्यम ने विश्वविद्यालय के लिए इसे ऐतिहासिक क्षण बताते हुए कहा कि यह पञ्चाङ्ग उत्तराखंड में ज्योतिष के अध्येताओं के लिए ज्ञान का प्रमुख स्रोत बनकर उभरेगा, प्रदेश के दूर दराज क्षेत्रों के लोग इससे अत्यधिक लाभान्वित होंगे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रोफेसर रमाकान्त पांडेय ने कहा कि आदिकाल से ही उत्तराखंड की धरती पर अनेक ज्योतिष के विद्वान पैदा हुए हैं, जिनकी भविष्यवाणियां सच साबित होती थीं, कालगणना करने वाले बहुत से विद्वान इस धरती की पहचान हुआ करते थे, उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय उस प्राचीन परंपरा को बनाये रखने लिए कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि समाज को जोड़ने के लिए उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय से जल्दी ही पञ्चाङ्ग का प्रकाशन किया जाएगा। कुलपति ने विश्वास व्यक्त किया कि कुछ ही समय बाद केदारमानस पञ्चाङ्ग की पहचान उत्तराखंड ही नहीं पूरे देश में बनेगी।

पञ्चाङ्ग कार्यशाला के संयोजक एवं वरिष्ठ प्रोफेसर मोहन चंद्र बलोदी ने बताया कि त्रिदिवसीय कार्यशाला में पञ्चाङ्ग को संशोधित कर लोकार्पण के लिए तैयार कर लिया गया है। प्रोफेसर बलोदी ने बताया कि कार्यशाला में बाह्य विशेषज्ञ प्रोफ़ेसर पीवीबी सुब्रह्मण्यम निदेशक केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय रघुनाथ कीर्ति परिसर देवप्रयाग,भारत भूषण ज्योतिष विभाग के समन्वयक केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय भोपाल परिसर , भोपाल परिसर से ही डॉ. भूपेन्द्र पांडेय, डॉ रोहित पचौरी, आंतरिक विशेषज्ञ प्रोफेसर एम सी बलोदी, डॉ राजेश सती सहायक आचार्य (अतिथि) की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

