जोगेंद्र मावी, ब्यूरो
खनन माफियाओं के साथ राजनीति में भी अपनी अच्छी खासी पैठ बना ली थी। वह अपने साथी को राजनीति में उतारने के लिए विधानसभा चुनाव में उतारने की तैयारी कर रहा था। उसने एक न्यूज पोर्टल भी चलाया हुआ था और माफिया यानि दलाल टाइप के पत्रकारों को जोड़ा हुआ था, ऐसे पत्रकार जोकि दूसरों के टुकड़ों पर पलकर ऐशो आराम करते हैं। उसके हत्याकांड से तमाम राजनीतिक, पत्रकारों, अधिकारियों में भी दहशत है कि कहीं उनका नाम सामने न आ जाए। जब वह जिम करता था तो गले में मोटी सोने की चैन पहनता था, इसके अलावा महंगे ट्रैक सूट, चश्मा भी पहनता था। उसका व्यवहार इतना सरल था कि सभी उससे बात करते तो सभी से प्यार से बात करता था। हालांकि उसका जन्मदिन 20 फरवरी को है।
ताइक्वांडो सिखाते-सिखाते विक्रम शर्मा जरायम की दुनिया का मास्टरमाइंड बन गया। पिता अमित लाल के साथ उत्तराखंड से झारखंड पहुंचे विक्रम ने ऐसा रसूख बनाया कि हर बड़े कांड में उसका नाम आने लगा। जमशेदपुर में कई हत्याओं और बम धमाके में साजिशकर्ता तक के रूप में उसका नाम सामने आया।

कई बार विक्रम की हत्या की खबरें भी फैलीं लेकिन वह बार-बार अपराध का नया इतिहास लेकर सामने आ जाता था। बात सन 2000 से पहले की है। विक्रम के पिता अमित लाल टाटा स्टील में नौकरी करने के लिए उत्तराखंड से झारखंड शिफ्ट हुए थे। विक्रम ताइक्वांडो का शौकीन था।
वह तत्कालीन बीएमपी ग्राउंड में ट्रेनिंग देता था। झारखंड का गैंगस्टर अखिलेश तब उसका छात्र था। विक्रम का छोटा भाई अरविंद शर्मा अखिलेश सिंह का दोस्त था, ऐसे में दोनों के बीच घरेलू संबंध थे। वर्ष 1999 में अखिलेश सिंह ने तेल कारोबारी ओम प्रकाश काबरा का अपहरण किया।
तब पुलिस ने इस मामले में विक्रम सिंह के घर पर छापा मारा था। यह पहली दफा था जब विक्रम का पुलिस से एक आरोपी के तौर पर सामना हुआ। यही उसका अपराध की दुनिया में पहला कदम भी था। पुलिस को छापे में पिंकी की फोटो मिली थी। पिंकी ओमप्रकाश के साथी कारोबारी अशोक शर्मा की पत्नी थी। विक्रम के भाई अरविंद शर्मा ने 1998 में जमशेदपुर में अशोक की हत्या कर दी। बाद में अरविंद ने पिंकी से शादी कर ली। इस हत्याकांड के बाद अरविंद अब तक पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ा है।
जमशेदपुर के सिदगोड़ा थाने के अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार ने बताया कि विक्रम ओम प्रकाश के बाद टाटा स्टील के सुरक्षा अधिकारी जयराम हत्याकांड और बम धमाके की घटनाओं के बाद चर्चा में आया। उसने अखिलेश के साथ इन घटनाओं को अंजाम तक पहुंचाया था। अखिलेश इस समय झारखंड की उप राजधानी दुमका की जेल में बंद है।

इन घटनाओं में भी साजिशकर्ता रहा विक्रम
1- श्री लेदर्स के मालिक आशीष डे की हत्या
2- रवि चौरसिया पर फायरिंग
3- पूर्व जज आरपी रवि पर फायरिंग
4- कांग्रेस नेता नट्टू झा के कार्यालय पर गोली कांड
राजनेताओं, प्रेस और पुलिस प्रबंधन में माहिर था विक्रम
विक्रम थ्री पी यानी पॉलिटिशियन, प्रेस और पुलिस प्रबंधन में माहिर था। झारखंड के बड़े-बड़े राजनेताओं के साथ उसके अच्छे संबंध थे। सूत्रों के अनुसार विक्रम आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी भी कर रहा था। इसके लिए वह अलग-अलग नेताओं से मुलाकात करता था। उसने अखिलेश सिंह को चुनाव की तैयारी करने की जिम्मेदारी सौंंपी थी। अखिलेश जेल से ही तैयारियों में जुटा हुआ था।

झारखंड में न्यूज पोर्टल भी चलाता था विक्रम
झारखंड आधारित पुलिस सूत्रों के मुताबिक विक्रम शर्मा झारखंड में एक न्यूज पोर्टल भी चलाता था। इसमें कुछ लोगों की साझेदारी भी है। विक्रम पर लोगों को ब्लैकमेल कर रंगदारी मांगने की बात भी सामने आई है। लोगों के मन में उसका काफी खौफ रहता था।
स्टोन क्रशर पर छाया सन्नाटा
मृतक विक्रम शर्मा ने एक दशक पहले झारखंड से आकर यहां स्टोन क्रशर स्थापित किया था। किसी मामले में गिरफ्तारी के बाद उनका छोटा भाई अरविंद शर्मा ही क्रशर को संभालते थे। जेल से बाहर आने पर उन्होंने क्रशर को फिर अपने हाथ में ले लिया था। क्रशर से तीन किमी की दूरी पर गांव पिपलिया में विक्रम शर्मा का मकान है। कुछ दिन रहने के बाद वह परिवार के साथ देहरादून जाकर शिफ्ट हो गए थे। वर्तमान में उनके गांव पिपलिया स्थित मकान में कोई नहीं रहता है। उनका एक छोटा भाई अरविंद शर्मा भी काशीपुर में रहता है। खनन कारोबार से जुड़ने पर क्षेत्र में उन्होंने अपनी अच्छी पैठ बना रखी थी।

क्रशर का हिसाब किताब लेने के लिए वह एक दो महीने में आते रहते थे। जानकारी के अनुसार मृतक के पिता अमृत लाल शर्मा टाटा स्टील कंपनी में नौकरी करते थे। सेवानिवृत्त होने पर वह देहरादून में बस गए थे जबकि मूल रूप से अमृत लाल शर्मा देहरादून के ही रहने वाले थे।
विक्रम शर्मा की हत्या होने की खबर मिलते ही छोई मार्ग स्थित अमृत स्टोन क्रशर पर सन्नाटा छा गया। क्रशर का संचालन भी बंद कर दिया गया जिस पर क्रशर पर इक्का दुक्का कर्मचारी ही दिखे।
विक्रम शर्मा के बारे में क्षेत्र के खनन कारोबारी अनभिज्ञ थे। क्षेत्रवासियों का कहना है कि विक्रम शर्मा लोगों के साथ शालीनता से पेश आते थे। कई मजूदरों ने बताया कि उनके मालिक विक्रम शर्मा उनकी हर समय मदद करने के लिए तैयार रहते थे। कभी उन्हें परेशान नहीं किया।

