ब्यूरो रिपोर्ट
मिशन—2027 में उतरने की तैयारी कर रहे भाजपा नेता एवं प्रॉपर्टी डीलर की हत्या में दो हमलावरों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। मृतक नेता की चौहान बिरादरी के साथ अन्य समाज में अच्छी छवि थी। उनका सपना विधायक बनना था। लेकिन मामूली से विवाद में उनकी हत्या कर दी गई।
गोरखपुर के चिलुआताल थाना क्षेत्र के बरगदवा में मंगलवार को मॉर्निंग वॉक पर निकले प्रॉपर्टी डीलर और पार्षद प्रत्याशी रहे राजकुमार चौहान (55) की हत्या कर दी गई। हमलावरों ने पहले गोली मारी फिर चाकुओं से गोदकर प्रॉपर्टी डीलर को मार डाला। वारदात को अंजाम देने के बाद हमलावर मौके पर ही रुके रहे और तब तक नहीं गए जब तक प्रॉपर्टी डीलर की मौत नहीं हो गई।
वारदात से आक्रोशित ग्रामीणों ने गोरखपुर-सोनौली मार्ग जाम कर प्रदर्शन शुरू कर दिया। मौके पर पहुंची पुलिस ने हल्का बल प्रयोग कर जाम खुलवाया। प्राॅपर्टी डीलर की पत्नी सुशीला देवी की तहरीर पर पुलिस ने आठ नामजद समेत 11 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है।
देर रात पुलिस ने सीसीटीवी कैमरे की मदद से दो हत्यारोपियों को गिरफ्तार कर लिया। जबकि नामजद सात आरोपियों को हिरासत में लेकर उनकी भूमिका की जांच कर रही है। पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने मौके पर साक्ष्य जुटाए और शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया। पत्नी के अनुसार, पुरानी दुश्मनी के चलते हत्या की गई है। पुलिस प्रॉपर्टी विवाद और व्यक्तिगत रंजिश सहित अन्य पहलुओं पर जांच कर रही है।
जानकारी के मुताबिक, घटना सुबह करीब 5:30 बजे की है। परिजनों के अनुसार, राजकुमार चौहान प्रॉपर्टी डीलर के साथ स्थानीय राजनीति में भी सक्रिय थे। वह 2027 में विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे। परिवार में पत्नी सुशीला के अलावा तीन बच्चे सोनम, प्रियंका, युवराज और बुजुर्ग पिता जंगीलाल हैं।

पिता जंगीलाल ने बताया कि राजकुमार रोजाना की तरह सुबह पांच बजे घर से टहलने निकले थे। करीब आधे घंटे बाद उनकी हत्या की खबर मिली। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, चार हमलावर पैदल पहुंचे और पीछे से घेरकर पहले गोली चलाई फिर सिर, सीने और चेहरे पर चाकू से 12-13 बार वार किए। हमले के दौरान वह जान बचाकर भागे लेकिन हमलावरों ने उन्हें दौड़ाकर करीब 100 मीटर दूर पकड़ लिया और दोबारा हमला कर दिया। इसके बाद हमलावर भाग गए।
सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची पुलिस उन्हें बीआरडी मेडिकल कॉलेज ले गई, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। घटनास्थल पर खून के निशान और उनके जूते बरामद हुए हैं। पुलिस को आशंका है कि हमलावर वाहन कुछ दूरी पर खड़ा कर पैदल पहुंचे थे।
वारदात के बाद क्षेत्र में आक्रोश फैल गया। 500 से अधिक ग्रामीणों ने गोरखपुर-सोनौली मार्ग जाम कर प्रदर्शन शुरू कर दिया। सूचना पर 10 थानों की पुलिस फोर्स मौके पर पहुंची। समझाने के बावजूद भीड़ नहीं मानी तो पुलिस ने हल्का बल प्रयोग कर जाम खुलवाया।
देर रात पुलिस ने सीसीटीवी कैमरे की मदद से दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपियों की पहचान गांव के ही रहने वाले डंपर चालक राज चौहान और विपिन यादव के रूप में हुई है। विपिन पर पूर्व में भी दो आपराधिक मामले दर्ज हैं।

पूछताछ में राज चौहान ने बताया कि एक सप्ताह पहले राज चौहान और उसके भाई निवेश का व मृतक के भतीजे नीरज चौहान बीच आपस में कहासुनी हो गयी थी, तो उसे लगा कि नीरज चौहान अपने चाचा राजकुमार चौहान के बल पर गाली गलौज दे रहा हैं, इसके चलते उसने अपने विपिन यादव से साथ मिलकर राजकुमार की हत्या कर दी। इसके बाद वह नीरज चौहान की हत्या करने वाला था। इस बीच पुलिस ने उसे दबोच लिया। वारदात को अंजाम देने के लिए वह चार माह से रेकी कर रहे थे।
नामजद आरोपियों में पार्षद भी शामिल
नामजद आरोपियों में वार्ड नंबर 14 डॉ. राजेंद्र प्रसाद नगर के पार्षद धर्मदेव चौहान, दीपक गौड़, लालजी यादव उर्फ गट्टू, धर्मपाल चौहान, अमर सिंह चौधरी, मोनू पांडेय, सत्येंद्र चौधरी उर्फ टिल्लू, अभय पांडेय व तीन अन्य शामिल हैं।
बोले एसएसपी
इस संबंध में एसएसपी डॉ. कौस्तुभ ने कहा कि प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। सीसीटीवी कैमरे की मदद से हत्या में शामिल दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। वहीं सात नामजद आरोपियों को हिरासत में लेकर उनकी भूमिका की जा रही है। पुलिस की आठ टीमें हर बिंदु पर जांच कर रही हैं। पकड़े गए आरोपियों ने पूछताछ में पुरानी रंजिश में हत्या की वारदात कबूल की है।
पुरानी रंजिश और राजनीतिक टकराव के एंगल पर भी जांच
राजकुमार चौहान की हत्या की जांच में पुलिस हर पहलू को देख रही है। पुलिस सिर्फ हालिया घटनाओं तक सीमित नहीं रह रही, बल्कि उनके पुराने विवाद और राजनीतिक रंजिशों की जानकारी भी खंगाल रही है।

ग्रामीणों के अनुसार, वर्ष 2023 में राजकुमार चौहान के करीबी का गांव के दीपक गौड़ के साथ गंभीर विवाद हुआ था। उस समय गोली चलने की घटना हुई थी, जिसमें राजकुमार का नाम भी संदेह के घेरे में आया था। पुलिस अब उस मामले के सच का पता लगाने में जुटी है। इसके अलावा पार्षद के चुनाव के दौरान भी राजकुमार चौहान का वर्तमान पार्षद धर्मदेव चौहान के साथ टकराव हुआ था।
यह विवाद इतना बढ़ गया कि राजकुमार को जेल जाना पड़ा। पुलिस इस राजनीतिक रंजिश के एंगल को भी गंभीरता से जांच में शामिल कर रही है। राजकुमार चौहान स्थानीय राजनीति में सक्रिय और प्रभावशाली चेहरा थे। वह पूर्व पार्षद प्रतिनिधि रह चुके थे और क्षेत्र में उनकी अच्छी पकड़ थी। बताया जा रहा है कि वह 2027 में विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रहे थे। उनका राजनीतिक नेटवर्क बड़े नेताओं तक फैला हुआ था, जिसमें कैबिनेट मंत्री दारा सिंह चौहान और राज्यसभा सांसद राधा मोहन अग्रवाल के साथ नजदीकियां शामिल थीं।
पत्नी बोली- तरक्की देख गांव में ही बन गए कई दुश्मन
पूर्व पार्षद प्रतिनिधि राजकुमार चौहान की हत्या के बाद उनकी पत्नी सुशीला चौहान का रो-रोकर बुरा हाल है। वह सड़क पर बैठी रो रही थीं। वह कई बार बेसुध भी हुईं। परिवार की महिलाएं उन्हें संभालने में जुटी थीं। सुशीला ने बताया कि राजकुमार को आगे बढ़ता देखकर गांव के ही कुछ लोग जलते थे। इसी जलन में उन्होंने उनकी हत्या की है। गांव में ही उनके दुश्मन थे। सुशीला ने कहा कि हमारे छोटे-छोटे तीन बच्चे हैं, हम अब कैसे रहेंगे।

पिता बोले- मरने से पहले बेटे ने दीपक का लिया था नाम
पिता जंगीलाल का कहना था कि राजकुमार ने दो बार चिल्लाकर दीपक का नाम लिया है। उन्होंने गांव के एक व्यक्ति द्वारा झूठे मामले में जेल भेजने की बात भी कही। उन्होंने राजनीतिक द्वेष में हत्या का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि हत्यारों ने उनका सबकुछ छीन लिया। अब वे किसके सहारे जीएंगे। अक्सर राजकुमार जब माॅर्निंग वाक पर जाते थे तो उनके साथ कुछ और लोग होते थे लेकिन आज वह अकेले गए थे।
पुलिस की मौजूदगी में दाह संस्कार
रात करीब 8:45 बजे रोहिणी नदी के किनारे पुलिस की मौजूदगी में दाह संस्कार किया गया। बेटे युवराज ने मुखाग्नि दी। इस दौरान राजनेताओं और सैकड़ों ग्रामीणों की उपस्थिति रही।
