जोगेंद्र मावी, ब्यूरो
हरिद्वार। हरिद्व़ार में हरकी पैड़ी के साथ गंगा घाटों पर गैर हिंदुओं यानि मुस्लिमों का प्रवेश प्रतिबंध कर दिया है। श्रीगंगा सभा की ओर से कुंभ क्षेत्र में भी गैर हिंदुओं के प्रवेश पर भी प्रतिबंध लगाने की मांग उठा रहे हैं। गैर हिंदू कोई अधिकारी हो या मीडियाकर्मी, नियम सभी के लिए है। प्रवेश प्रतिबंध करने के दौरान म्यूनिसिपल एक्ट का हवाला दिया जा रहा है। इसके साइन बोर्ड भी हरकी पैड़ी प्रवेश द्वार के साथ घाटों पर भी लगवा दिए गए हैं।
ये आदेश तो लागू करवा दिया गया है कि लेकिन नाईघाट पर तो अधिकांश गैर हिंदू ही बाल काटने या मुंडन का काम करते हैं, उन्हें कब हटवाओगे।
श्री गंगा सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम ने पिछले दिनों प्रेसवार्ता कर पूरे कुंभ क्षेत्र में गैर हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने की मांग उठाई। श्री गंगा सभा के सचिव उज्जवल पंडित ने हरकी पैड़ी पर लगाए गए बोर्ड के फोटो भी शेयर किए। जिसमें स्पष्ट लिखवाया गया है कि अहिंदू का प्रवेश पूरी तरह निषेध है। इसके अलावा तीर्थस्थल की मर्यादा को ध्यान में रखते हुए हरकी पैड़ी और मालवीय द्वीप क्षेत्र में ड्रोन उड़ाना प्रतिबंधित है। किसी भी प्रकार के फिल्मी गानों पर फिल्म और रील बनाना भी पूर्णतः वर्जित है। श्रीगंगा सभा ने इस प्रकार से रील्स आदि सोशल मीडिया पर वायरल करने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है।

लेकिन जो हरकी पैड़ी पर पूजा कराने वाले पुजारी है वे गुटका पान तबाकू चबाते रहते हैं। जाहिर है कि उन्हें थूकते भी वहीं पर ही होंगे।
इसी के साथ सबसे बड़ी बात तो ये भी है कि जो भी धार्मिक सामान है उसे कैसे वेरिफाई करेंगे कि उसका निर्माण किसी हिंदू कारीगर ने किया या गैर हिंदू ने। हालांकि कांवड़ यात्रा में प्रयुक्त होने वाली अधिकांश सामग्री गैर हिंदू ही तैयार करते हैं। हरिद्वार में अखाड़े आश्रमों के निर्माण हो या सौंदर्यीकरण का कार्य, सभी गैर हिंदू ही करते हैं। जिस सौफे या कुर्सी पर सभी बैठते हैं उस फर्नीचर को भी मुस्लिम समाज के युवा ही तैयार करते हैं।
यही नहीं, हरकी पैड़ी पर कुंभ—2021 में सौंदर्यीकरण का काम हुआ तो पेंट करने वाले हिंदू पेंटर नहीं मिले तो फिर गैर हिंदुओं से ही कराया गया।

बताने का आश्रय सिर्फ ये ही है ये कि ये चंद लोग अपनी राजनीति चमकाने के लिए आम जनता को भड़काने और द्वेष पैदा करना चाहते है। हरकी पैड़ी के सौंदर्यीकरण के लिए वर्ष 2020 में 32 करोड़ रुपये का बजट जारी हुआ था, उसमें कितने काम हुए कोई हिसाब किताब लेने वाला नहीं है। कितना चंदा एकत्रित होता है कि उसका कितना उपयोग गंगा हित में होता है कोई नहीं पूछता।
हरकी पैड़ी पर दान में आए सोना चांदी का गबन हुआ उसका हिसाब किसी ने नहीं मांगा। भाजपा के राज्यसभा सांसद रहे तरुण विजय ने भी पंडित पुरोहितों की कार्यशैली पर प्रश्न चिन्ह लगाया था। सुधार करने के बजाय कुछ बदलाव नहीं किया।

