जोगेंद्र मावी, ब्यूरो
हरिद्वार। हरिद्वार जिले में प्रॉपर्टी डीलर या कॉलोनाइजरों का बड़ा खेल सामने आया है। कॉलोनाइजर स्वयं शिकायत करवाकर अपनी अस्वीकृत कॉलोनी को सील कराता है। सीलिंग के पीछे कॉलोनाइजर का बड़ा दिमाग होता है। वह किसान और प्लॉट खरीददारों को गुमराह करने का काम करते हैं। इसके पीछे की वजह सामने आई है।
हरिद्वार जिले में शहरों, कस्बों के आसपास से लेकर दूर दराज तक कॉलोनी ही कॉलोनी काटी गई हैं। लगातार खेतों को समाप्त कर वहां पर कॉलोनाइजर कॉलोनी काटकर प्लॉट बेचने लगता है। कॉलोनाइजर जब किसान से उसकी भूमि का सौदा करता है तो समय 6 महीने से लेकर एक साल या अधिकतम दो साल तक का तय होता है। उसकी कीमत भी समयानुसार ही तय होती है। कॉलोनाइजर किसान से एग्रीमेंट का सौदा होने पर खेत में कॉलोनी का नक्शा जारी करता है और बिना किसी सुविधा तैयार किए ही प्लॉट बेचना शुरू कर देता है। खरीदने वाले भी सोचते है नई कॉलोनी कटी है तो पहले सस्ते और फिर महंगे में प्लॉट मिलेगा।
कॉलोनाइजर प्लॉट बेचते समय मात्र दो चार महीने में सुविधा देने का वादा करता है, उधर किसान से तय हुए सौदे का समय पूरा होने लगता है और उसकी रकम भी देने का समय आ जाता है। उधर कॉलोनाइजर कॉलोनी में सडक का प्लॉटों की निशानदेही का काम भी कराता है। लेकिन जब वह पूरी सुविधा नहीं दे पाता और किसान भी अपनी रकम मांगने लगता है तो उस समय कॉलोनाइजर किसी अमुक व्यक्ति से कॉलोनी काटे जाने की शिकायत प्राधिकरण में करवाता है। प्राधिकरण शिकायत मिलते ही कॉलोनी में ध्वस्तीकरण कर सीलिंग कार्रवाई कर देता है। अब कॉलोनी सील होते ही कॉलोनाइजर का बहाना शुरू हो जाता है कि वह कॉलोनी को रेगुलाइज या अप्रूव्ड करवा रहा है और उसी प्रक्रिया में महीने—साल ऐसे ही गुजार देता है। ऐसे में कॉलोनाइजर ने किसान के रुपये समय से देता है और न ही प्लॉट खरीदने वालों को घर बनाने का मौका।
इन सभी धोखाधड़ी से बचने के लिए हरिद्वार—रुड़की विकास प्राधिकरण लगातार प्रचार प्रसार कर रहा है कि कभी भी बिना स्वीकृत हुए कॉलोनी में प्लॉट न खरीदें।

