जोगेंद्र मावी, ब्यूरो
मुख्यमंत्री बनने का ख्वाब देख रहे कैबिनेट मंत्री धन सिंह रावत से स्वास्थ्य विभाग छीन लिया है। उन पर मेडिकल कॉलेजों में भर्ती कराने का घोटाला करने के साथ स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार न कराने का आरोप था। वे केवल ब्यान देकर सुर्खियों में बना रहना चाहते थे।
कैबिनेट मंत्री धन सिंह रावत पर शिक्षा, सहकारिता के साथ सबसे बड़ा विभाग स्वास्थ्य विभाग था। स्वास्थ्य विभाग की सेवाओं में विस्तार का जिम्मा उन पर था, लेकिन सरकारी अस्पतालों में फिजिशियन, सर्जन तो किया कुछ अस्पतालों में तो ताला बंद करने की नौबत थी। हरिद्वार में दो साल से राजकीय मेडिकल कॉलेज संचालित है, लेकिन उसमें मरीज भर्ती जैसी सुविधा तक नहीं करा सके। कांग्रेस नेता अशोक शर्मा लंबे समय से मेडिकल कॉलेज और भूपतवाला में बने अस्पतालों में डॉक्टर न होने और मरीज भर्ती न होने का मुद्दा उठा रहे थे। यहीं नहीं, जनपद में बनी नई सीएचसी, पीएचसी की ​बिल्डिंगों का उद्घाटन तक नहीं करा सके। बिल्डिंगों में भी धूल मिट्टी चढने लगी। उनमें स्टाफ तक नियुक्त नहीं करा सके।


प्रदेश में बने कई मेडिकल कॉलेजों में हुई भर्ती घोटाले में उनपर गंभीर आरोप लगे। सहकारिता में भी उन पर उन पर गंभीर आरोप लगते रहे हैं। प्रदेश में सरकार की छवि को सुधारने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उनसे स्वास्थ्य विभाग हटाकर कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल को सौंप दिया है।
हालांकि कैबिनेट मंत्री धन सिंह रावत की प्रबल इच्छा रही है कि वे प्रदेश के मुखिया के तौर पर जनता की सेवा करें, लेकिन उनके मंत्रालयों में हुए विकास कार्यों को देखकर जनता मायूस रही है।

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