जोगेंद्र मावी, ब्यूरो
हरिद्वार। हरिद्वार का जिला पूर्ति अधिकारी 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ पकड़ा गया। साथ ही उसके सहयोगी को भी रंगेहाथ गिरफ्तार किया है। हालांकि इससे पहले भी नियुक्त रहा डीएसओ एक नंबर का रिश्वतबाज था, लेकिन यह उसका भी बाप था। नियुक्त होते ही सभी राशन डीलरों पर मिलावटी सड़े हुए चावलों को उठाने का भी दवाब बना रहा था। यह कार्रवाई जिला पूर्ति कार्यालय परिसर में ही की गई, जिससे पूरे महकमे में हड़कंप मच गया। डीएसओ सभी अधीनस्थों के साथ अन्य विभाग के अधिकारियों और राशन डीलरों को कैबिनेट मंत्री का रिश्तेदार बताता था। साथ ही रौब झाड़ता था कि उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा। लेकिन धामी की सरकार में भ्रष्टाचार की कोई जगह नहीं।
जिला पूर्ति अधिकारी द्वारा एक राशन डीलर से किसी कार्य के एवज में 50,000 रुपये की अवैध मांग की जा रही थी। परेशान होकर पीड़ित राशन डीलर ने विजिलेंस विभाग से शिकायत की। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए विजिलेंस टीम ने जाल बिछाया और तय योजना के अनुसार जैसे ही रिश्वत की रकम दी गई, टीम ने मौके पर ही अधिकारी और उनके सहायक को दबोच लिया। विजिलेंस ने आरोपियों के पास से रिश्वत की पूरी रकम भी बरामद कर ली है। जानकारी में आया है कि ये पहले भी अन्य जिले में सस्पेंड रहा था।

इस कार्रवाई से साफ है कि सरकार और विजिलेंस भ्रष्टाचार को लेकर किसी भी स्तर पर समझौता करने के मूड में नहीं हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर प्रदेशभर में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त अभियान चलाया जा रहा है। हरिद्वार जनपद में लगातार हो रही विजिलेंस की कार्रवाइयों से भ्रष्ट अधिकारियों में खौफ का माहौल बनता नजर आ रहा है।

