जोगेंद्र मावी, ब्यूरो
हरिद्वार। गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के वनस्पति एवं सूक्ष्म जीव विज्ञान विभाग द्वारा बाल दिवस के अवसर पर हेपेटाइटिस बी एवं एचआईवी के निदान हेतु इम्यूनोलॉजिकल तकनीकों एवं एलीसा विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया। जिसमें संक्रामक रोगों के निदान में अत्यंत विश्वसनीय, संवेदनशील और व्यापक रूप से उपयोग की जाने वाली तकनीक एलीसा के बारे में विस्तार से बताया।
विभाग के सहायक आचार्य डॉ हरीशचन्द्र ने विद्यार्थियों को एलीसा तकनीक के सिद्धांतए प्रकारए चरणों एवं वैज्ञानिक आधार के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि ELISA (Enzyme-Linked Immunosorbent Assay) वर्तमान समय में हेपेटाइटिस बी और एचआईवी जैसे गंभीर संक्रामक रोगों के निदान में अत्यंत विश्वसनीय, संवेदनशील और व्यापक रूप से उपयोग की जाने वाली तकनीक है।
कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों को एलीसा प्लेट की तैयारी, अभि कर्मकों के उपयोग, सैंपल प्रोसेसिंग, इनक्यूबेशन, वॉशिंग, एंजाइम सब्सट्रेट अभिक्रिया तथा परिणामों की व्याख्या जैसी सभी आवश्यक प्रक्रियाओं का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। विद्यार्थियों ने वास्तविक नमूनों पर कार्य करते हुए परीक्षण की सम्पूर्ण प्रक्रिया को समझा तथा आधुनिक प्रयोगशाला पद्धतियों से परिचित हुए। इससे उन्हें न केवल नैदानिक माइक्रोबायोलॉजी के क्षेत्र की व्यावहारिक समझ प्राप्त हुई, बल्कि भविष्य में अनुसंधान एवं क्लिनिकल लैबोरेटरी प्रैक्टिस में योगदान देने की प्रेरणा भी मिली।

विभागाध्यक्ष प्रो. मुकेश कुमार ने इस अवसर पर विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान युग में संक्रामक रोगों की पहचान के लिए उन्नत तकनीकों का ज्ञान अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि एलीसा जैसी आधुनिक तकनीकें न केवल निदान की विश्वसनीयता बढ़ाती हैं, बल्कि समय पर उपचार सुनिश्चित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों का लाभ उठाने, प्रयोगात्मक कौशल विकसित करने एवं अनुसंधान के प्रति जिज्ञासा बनाए रखने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने विभाग द्वारा समय—समय पर विद्यार्थियों के लिए आयोजित किए जाने वाले प्रायोगिक एवं कौशल आधारित कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए बताया कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को रोजगारोन्मुखी ज्ञान एवं प्रयोगशाला तकनीकों की बेहतर समझ प्रदान करते हैं।
कार्यशाला के अंत में प्रतिभागी विद्यार्थियों ने यह प्रशिक्षण अत्यंत उपयोगी एवं ज्ञानवर्धक बताया। विद्यार्थियों ने कहा कि एलीसा तकनीक की व्यावहारिक जानकारी उनके लिए भविष्य के शिक्षणए शोध तथा प्रयोगशाला कार्यों में अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगी।
इस प्रकार बाल दिवस के उपलक्ष्य पर आयोजित यह एक दिवसीय प्रशिक्षण कम कार्यशाला सफलतापूर्वक संपन्न हुई और विद्यार्थियों को आधुनिक निदान तकनीकों का महत्वपूर्ण अनुभव प्रदान किया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में एमएससी माइक्रोबायोलॉजी तृतीय सेमेस्टर के 25 विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया। कार्यशाला का संचालन विभाग के सहायक आचार्य डॉ. हरीश चन्द्र एवं उनकी टीम विजेता चौधरी, सागर विश्वकर्मा एवं हिमानी पंवार द्वारा किया गया।

