जोगेंद्र मावी, ब्यूरो
हरिद्वार। अधिकारियों की लापरवाही या विभाग में किए गए भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए आरटीआई के जवाब में अनाप शनाप डाक्यूमेंट अटैच कर दे दिए। अपनी कारगुजारियों को छिपाने के लिए बिलों के टेंडर को छिपाने के लिए यह खेला कर दिया।
आरटीआई के जवाब में नगर पालिका लक्सर के अधिकारी ने गोलगप्पों की लिस्ट थमा दी। अब गोलगप्पों की ये लिस्ट सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही है। नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी मोहम्मद कामिल भी इस गलती को मान रहे हैं। हालांकि, उनका कहना है कि एक आवेदक द्वारा विकास कार्यों को लेकर सूचना मांगी थी। सूचना में दिए गए दस्तावेजों में गलती से ये बिल भी चला गया होगा। वहीं, लिस्ट सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोग जमकर प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
लक्सर निवासी शिवम कश्यप ने बताया कि उन्होंने नगर पालिका क्षेत्र में हुए विकास कार्यों तथा समाचार पत्रों में प्रकाशित टेंडरों से संबंधित जानकारी सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत मांगी थी। नगर पालिका कर्मचारियों द्वारा मांगी गई सूचना के आधार पर संबंधित दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां आवेदक को उपलब्ध करा दी गईं। जब आवेदक ने इन दस्तावेजों की जांच की, तो उन्हें उनमें एक चौंकाने वाली प्रति मिली।


दस्तावेजों के बीच एक प्रतिष्ठित मिष्ठान की दुकान की रेट लिस्ट भी संलग्न थी। इस सूची में चाट-पकौड़ी और गोलगप्पों की कीमतें दर्ज थीं। यह देखकर आवेदक हैरान हो गया, उसने इस रेट लिस्ट को अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा कर दिया, जिससे मामला तेजी से वायरल हो गया। मामला सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोग मजाकिया अंदाज में प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। साथ ही लोग जमकर चटकारे ले रहे हैं।
ईटीवी उत्तराखंड को दिए गए ब्यान के अनुसार नगर पालिका अधिशासी अधिकारी मोहम्मद कामिल का कहना है कि आवेदक द्वारा विकास कार्यों को लेकर सूचना मांगी थी। सूचना में दिए गए दस्तावेजों में गलती से यह बिल भी चला गया होगा। मिठाई की दुकानों से होली, दीपावली पर मिठाई मंगाई जाती है, हो सकता है वह रेट लिस्ट गलती से चली गई हो, कर्मचारियों से पूछताछ की जाएगी।
वहीं, यह घटना न सिर्फ नगर पालिका की कार्यशैली पर सवाल खड़े करती है, बल्कि ये भी दिखाती है कि आरटीआई कानून के तहत सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज कोई भी जानकारी सार्वजनिक हो सकती है, चाहे वह विकास कार्यों से जुड़ी हो या गलती से संलग्न चाट की लिस्ट।

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