जोगेंद्र मावी, ब्यूरो
हरिद्वार। पंजनहेड़ी गोलीकांड प्रकरण में वारंटियों को छुड़ाने के लिए बजरंग दल के नेताओं ने कनखल थाने में पूरी ताकत झोंक दी। पुलिस ने दवाब नहीं माना तो महिलाओं को आगे करते हुए दारोगाओं पर गंभीर आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया। जबकि पुलिस ने सवा महीने से आरोपियों को खुला छोड़कर रखा। जब कोर्ट ने तीनों आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी तो कार्रवाई करनी पड़ी।
मातृसदन के ब्रह्मचारी सुधानंद की अवैध प्लॉटिंग की शिकायत के बाद जांच के दौरान हुए गोलीकांड का प्रकरण सुर्खियों में है। दो परिवारों के बीच मातृसदन का रौंपा हुआ बीज अंकुरित होकर युद्ध क्षेत्र का वटवृक्ष बन गया। मामले में तीन फरार चल रहे आरोपियों को कनखल थाना पुलिस 9 मार्च दिन सोमवार को गिरफ्तार करके ले आई। जिसमें भाजयुमो के प्रदेश मंत्री तरुण चौहान पुत्र दीपक, गौरव चौहान पुत्र प्रदीप कुमार, अभिषेक चौहान (सिम्मी) पुत्र सतवीर है। इन आरोपियों में से एक अभिषेक चौहान उर्फ सिम्मी बजरंग दल के नेता सौरभ चौहान का भाई है। मामले में तीनों आरोपियों ने कोर्ट से अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर की, लेकिन कोर्ट से इन्हें कोई राहत नहीं मिल सकी। 28 जनवरी से 9 मार्च तक समय निकल जाने के बाद कनखल थाना पुलिस ने इन तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
लेकिन जैसे ही गिरफ्तारी की खबर परिजनों को मिली तो वे उन्हें छुड़ाने के लिए कनखल थाना पहुंच गए। परिजनों का दवाब पुलिस ने नहीं माना तो बजरंग दल के नेताओं ने पूरी ताकत झोंकते हुए सभी पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता थाना परिसर में इकट्ठे कर लिए। उन्होंने पुलिस से आरोपियों को छोड़ने के लिए कहा, लेकिन कोर्ट का मामला होने के चलते हुए पुलिस ने उनकी बात नहीं मानी।
इस पर बजरंग दल के नेता बिफर गए और पुलिस पर आरोप लगाने लगे। पुलिस को तो कतई गुंडों को संरक्षण देने वाला समूह बना दिया।
बजरंग दल के जिला संयोजक अमित मुलतानिया ने तो हदें ही पार कर दी। अमित मुलतानिया ने पुलिस पर ऐसे—ऐसे लांछन लगा दिए जैसे पुलिसकर्मी अपराध पर नियंत्रण नहीं करती हो केवल अपराधियों की सरगना हो।
जब बजरंग दल वालों की नहीं चली तो उन्होंने महिलाओं का साथ लिया। महिलाओं से पुलिस पर आरोप लगवाए। हालांकि पुलिस ने बिना दवाब के अपनी कार्रवाई की। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में आरोपियों को मेडिकल कराने के लिए लेकर चली गई।

