जोगेंद्र मावी, ब्यूरो
हरिद्वार। हरिद्वार कुंभ नगरी में द्वारिका शारदा एवं ज्योतिष पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती महाराज के शिविर का भूमि पूजन किया गया। भूमि पूजन के बाद विधि विधान से धर्म ध्वजा स्थापित की गई। शंकराचार्य महाराज के शिष्य एवं उत्तराधिकारी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज के साथ अन्य संतों ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ भूमि पूजन और धर्म ध्वजा कार्यक्रम सम्पन्न करवाया। अब सभी अनुयायी 8 अप्रैल को निकलने वाली पेशवाई की तैयारियों में जुट गए हैं।
महाकुंभ के लिए नीलधारा टापू पर शंकराचार्य नगर की विधिवत रूप से स्थापना हो गई। नवनियुक्त मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत के आदेश के बाद महाकुंभ के लिए भूमि आवंटन की प्रक्रिया शुरू हो गई। महाकुंभ मेले में पहले शिविर की स्थापना नीलधारा गंगा किनारे चंडी टापू पर शंकराचार्य मठ की पूरे विधि विधान के साथ धर्म ध्वजा स्थापित की गई। इस अवसर पर शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने बताया कि शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज महाकुंभ मेले के लिए प्रस्थान कर चुके हैं। वे 8 अप्रैल को निकलने वाली पेशवाई में शामिल होंगे। इसके लिए वे दो दिन पहले ही आएँगे। जिसके बाद शंकराचार्य कुंभ तक हरिद्वार में ही प्रवास पर रहेंगे। शंकराचार्य नगर में बने उनके पंडाल में कथा भागवत और उनके प्रवचन को श्रद्धालु सुन सकेंगे। धर्मध्वजा स्थापित होने के बाद महाकुंभ की विधिवत शुरुआत हो गई है। इस अवसर पर मेला आईजी संजय गुंज्याल, महामंडलेश्वर उमाकांतानंद सरस्वती महाराज, संजय महंत, जयराम आश्रम के पीठाधीश्वर ब्रह्म स्वरूप ब्रह्मचारी, रामानंद ब्रह्मचारी, श्री अखंड परशुराम अखाड़े के अध्यक्ष पंडित अधीर कौशिक, कथावाचक पंडित पवन शास्त्री, मेयर अनीता शर्मा, महंत शिवानंद महाराज, महंत रविदेव शास्त्री सहित मठ के साधु-संतों धर्म ध्वजा स्थापना एवं भूमि पूजन कार्यक्रम में शामिल हुए।


