जोगेंद्र मावी, ब्यूरो
हरिद्वार। श्री भगवानदास आदर्श संस्कृत महाविद्यालय, हरिद्वार में आज दिनाङ्क 15 मार्च 2026 को त्रिदिवसीय वार्षिकोत्सव का शुभारम्भ किया गया। इस वार्षिकोत्सव का आयोजन 15 से 17 मार्च 2026 तक किया जायेगा। इस वार्षिकोत्सव में विभिन्न क्रीडाप्रतियोगिताएँ जैसे कि क्रिकेट, बैडमिंटन, दौड़, योगासन एवं संस्कृतभाषण आदि प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जायेगा। साथ ही 17 मार्च को अखिल भारतीय संस्कृत शोध सम्मेलन का आयोजन, गतिमान् प्रतियोगिताओं का निर्णय एवं पुरस्कार वितरण के साथ समापन किया जायेगा।
वार्षिकोत्सव के उद्घाटनसत्र में संस्कृत जगत् के प्रतिष्ठित विद्वान् उपस्थित रहें। जिनमें महाविद्यालय की प्रबन्धसमिति के अध्यक्ष प्रो. यशवीर सिंह जी ने सभी प्रतिभागियों को अपना आशीर्वाद प्रदान किया। साथ ही कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह में
अवधूत मण्डल आश्रम के महंत एवं महामंडलेश्वर स्वामी रूपेन्द्र प्रकाश महाराज, गुरुकुल कांगड़ी (समविश्वविद्यालय) के कुलसचिव प्रो० सत्यदेव निगमालङ्कार, डॉ० वाजश्रवा आर्य उपनिदेशक उत्तराखण्ड संस्कृत शिक्षा परिषद, डॉ. नवीन पन्त आचार्य ऋषिकुल विद्यापीठ, हरिद्वार की गरिमामयी उपस्थिति रही।

अपने सम्बोधन में प्रो० सत्यदेव निगमालङ्कार ने विद्यार्थियों में देशभक्ति एवं राष्ट्रनिष्ठा के संस्कारों के विकास की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि प्रत्येक छात्र में राष्ट्र के प्रति समर्पण और उत्तरदायित्व की भावना का विकास होना चाहिए। उन्होंने कहा कि महाविद्यालय इस दिशा में सराहनीय कार्य कर रहा है। महामण्डलेश्वर श्री स्वामी रूपेन्द्र प्रकाश जी ने अपने उद्बोधन में महाविद्यालय के समग्र विकास एवं उन्नति की चर्चा करते हुए संस्थान द्वारा शिक्षा, संस्कार और सांस्कृतिक गतिविधियों के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की प्रशंसा की। डॉ० वाजश्रवा आर्य ने भी अपने वक्तव्य में महाविद्यालय की निरन्तर प्रगति और उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि संस्था शिक्षा के क्षेत्र में निरन्तर अग्रसर है। ऋषिकुल के सुप्रतिष्ठित विद्वान् श्री नवीन पन्त जी ने छात्रों को खेल मर्यादा से परिचित कराते हुए, सभी प्रतिभागियों को अग्रिम शुभकामानाएँ प्रदान की।
उद्घाटन कार्यक्रम के अन्त में महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य डॉ० रवीन्द्र कुमार ने सभी विशिष्ट अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया तथा सभी प्रतिभागियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
वार्षिकोत्सव समारोह का औपचारिक शुभारम्भ क्रिकेट प्रतियोगिता के रिबन काटकर किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय के शिक्षकगण, कर्मचारी एवं विभिन्न संस्कृत महाविद्यालयों के छात्र-छात्राएँ बड़ी
संख्या में उपस्थित रहे और कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

