जोगेंद्र मावी, ब्यूरो
हरिद्वार। उत्तरांचल स्टेट प्राइमरी टीचर्स एसोसिएशन शाखा जनपद हरिद्वार की जिला कार्यकारिणी तथा सभी विकासखंडों के अध्यक्ष, मंत्री एवं कोषाध्यक्षों की संयुक्त बैठक भागीरथी शिक्षक भवन/रिसोर्ट सेंटर, बौंगला बहादराबाद में आयोजित हुई। 30 जनवरी को सम्पन्न जनपदीय निर्वाचन के बाद यह पहली आधिकारिक संयुक्त बैठक रही। बैठक की अध्यक्षता प्रांतीय तदर्थ समिति सदस्य एवं पूर्व जिला अध्यक्ष मुकेश चौहान ने की।
बैठक में विभिन्न विकासखंडों की समस्याओं पर विस्तार से चर्चा हुई। रुड़की ब्लॉक की ओर से दुर्गम-सुगम निर्धारण तथा भोजन माता की सेवानिवृत्ति आयु का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। भगवानपुर ब्लॉक अध्यक्ष अनिल चमोली ने लंबित स्थायीकरण, चयन वेतनमान एरियर और अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) से जुड़े मामलों को रखा। लक्सर, खानपुर और नारसन ब्लॉकों के प्रतिनिधियों ने भी क्षेत्रीय समस्याएँ विस्तार से प्रस्तुत कीं।
विभाग द्वारा प्रस्तावित एक समान समय-सारिणी का सभी ब्लॉकों ने सर्वसम्मति से विरोध किया। पदाधिकारियों का कहना था कि हरिद्वार जनपद की भौगोलिक एवं जलवायु परिस्थितियाँ अन्य जिलों से भिन्न हैं, ऐसे में एकरूप समय-सारिणी व्यवहारिक नहीं है। वहीं टीईटी अनिवार्यता के मुद्दे पर भी पदाधिकारियों ने एक स्वर में विरोध दर्ज कराया। निर्णय लिया गया कि महासंघ के साथ समन्वय स्थापित कर प्राथमिकता के आधार पर आवश्यक कार्यक्रमों की रूपरेखा शीघ्र तय की जाएगी, ताकि शिक्षक हितों की प्रभावी रक्षा हो सके।


बैठक में शिक्षक हितों की सुरक्षा, लंबित प्रकरणों के त्वरित निस्तारण तथा संगठन की मजबूती से जुड़े कई प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए गए। जिला महामंत्री हेमेंद्र चौहान ने बैठक का संचालन किया, जबकि जिला अध्यक्ष अश्विनी चौहान ने समस्याओं के समाधान के लिए सकारात्मक पहल का आश्वासन दिया। संरक्षक अशोक चौहान ने संगठनात्मक एकजुटता पर बल देते हुए इसे संगठन की सबसे बड़ी शक्ति बताया।
बैठक में जिला अध्यक्ष अश्विनी चौहान, जिला महामंत्री हेमेंद्र चौहान, जिला कोषाध्यक्ष अरविंद शर्मा, संरक्षक अशोक चौहान, जिला संयुक्त मंत्री परविंदर सैनी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष राजीव शर्मा, उपाध्यक्ष राजेंद्र भंडारी, अमरीश वर्मा, कामिनी शर्मा, लेखाकार वीर सिंह पवार, विधि गुप्ता, संजय चौहान, बबलू सिंह, विनय शंकर पांडे सहित विभिन्न विकासखंडों के पदाधिकारी मौजूद रहे। संघ पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि शिक्षक सम्मान, अधिकारों की रक्षा और शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता सुदृढ़ करने के लिए संगठन लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक दायरे में रहकर सक्रिय भूमिका निभाता रहेगा।

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