जोगेंद्र मावी, ब्यूरो
हरिद्वार। भारतीय जनता पार्टी ने नेताजी को तीन बार पार्षद बनवाया। अपने कार्यकाल में पार्टी को बढ़ाने के बजाय घटाने का ही काम किया। कई बार अवैध कार्यों में भूमि कब्जाने में आश्रमों की विवादित भूमियों में हस्तक्षेप करना, पार्टी की खिलाफत करना, ऐसे तमाम प्रकरणॉ को देखते हुए चौथी बार टिकट नहीं दिया, तो नेताजी मौका परस्त निकले। अपनी ही पार्टी के खिलाफ निर्दलीय मैदान में उतर गए। अब पार्टी ने अनुशासन खिलाफ मानते हुए पार्टी से निष्कासित कर दिया है।
बात हो रही है वार्ड नंबर 1 सप्तऋषि की। भारतीय जनता पार्टी ने वार्ड से तीन बार पार्षद का प्रत्याशी अनिल मिश्रा को बनाया। पार्टी के कैडर वोटरों ने पार्टी के प्रत्याशियों को हर बार जीतने का काम किया। लेकिन इस जीत के बाद पार्षद जनता की उम्मीद पर खड़े नहीं उतरे। जनता के बीच में जाने के बजाय अपने निजी कार्यों में ही व्यस्त रहे। यहां तक की पार्टी की विचारधारा के खिलाफ ही काम करने लगे। कई बार संपत्तियों को कब्जाने के मामले में भी नाम सामने आया। इससे पार्टी की छवि बिगाड़ रही थी। अब चौथी बार जब चुनाव की प्रक्रिया शुरू हुई तो भाजपा ने सप्त ऋषि से पार्षद प्रत्याशी पुराने कार्यकर्ता आकाश भाटी को बनाया। इससे नाराज होकर अनिल मिश्रा निर्दलीय मैदान में उतर गए और पार्टी के प्रत्याशी का विरोध करने लगे। इससे भाजपा के जिला अध्यक्ष संदीप गोयल ने कई कार्यकर्ताओं के साथ अनिल मिश्रा को भी पार्टी से 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया।

